मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षक अपनी लंबित मांगों को लेकर फिर आंदोलन की राह पर हैं। राजधानी भोपाल के आंबेडकर पार्क में 30 मार्च को बड़े प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। इस आंदोलन में प्रदेशभर से हजारों अतिथि शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है।
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने बताया कि इस बार सभी संगठन एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे अब आंदोलन जरूरी हो गया है।
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चुनाव से पहले किए गए वादों पर अमल न होने से बढ़ा असंतोष
अतिथि शिक्षक आंदोलन की मुख्य वजह सरकार द्वारा किए गए वादों पर अमल न होना है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महापंचायत में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं।
इन घोषणाओं में विभागीय परीक्षा के जरिए स्थायीकरण, वार्षिक अनुबंध लागू करना और सीधी भर्ती में बोनस अंक देने जैसे वादे शामिल थे। हालांकि, अब तक इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण अतिथि शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
विधानसभा में सरकार के जवाब से और भड़का गुस्सा
आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष केसी पवार ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विधानसभा में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन वादों को पूरा करना संभव नहीं है।
इस बयान के बाद शिक्षकों का आक्रोश और बढ़ गया है। अब यह आंदोलन सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकार के रवैये के खिलाफ भी खड़ा हो गया है।
पीएमश्री स्कूलों से कार्यमुक्त करने के आदेश का विरोध
अतिथि शिक्षक संगठन ने पीएमश्री स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को 31 मार्च तक कार्यमुक्त करने के आदेश का भी विरोध किया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि हर साल 30 अप्रैल तक सेवा अवधि बढ़ाना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
उन्होंने मांग की है कि वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त करने के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही, स्थायी समाधान निकालने की दिशा में सरकार ठोस कदम उठाए।
सभी संगठनों की एकजुटता से आंदोलन को मिल रही ताकत
इस बार का आंदोलन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें सभी प्रमुख संगठन एक साथ आ रहे हैं। समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी पीडी खैरवार, बीएम खान, उमाशंकर बैस और रविकांत गुप्ता ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने की अपील की है।
संगठनों का मानना है कि एकजुटता से ही सरकार तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंचेगी। यही वजह है कि इस बार आंदोलन को पहले से ज्यादा बड़ा बनाने की रणनीति तैयार की गई है।