उज्जैन की पवित्र धरती पर एक बार फिर भक्ति का खास दृश्य देखने को मिला, जब देश की जानी-मानी कथावाचक जया किशोरी भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं। मंदिर परिसर में उनका आगमन होते ही श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल बन गया।
महाकालेश्वर मंदिर में जया किशोरी का यह दौरा सिर्फ एक साधारण दर्शन नहीं था, बल्कि भक्ति और श्रद्धा से भरा एक खास पल था। उन्होंने पूरे विधि-विधान से पूजा की और नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया, जहां वे पूरी तरह भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आईं।
जया किशोरी ने किए श्री महाकालेश्वर मंदिर में विधि-विधान से दर्शन
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल श्री महाकालेश्वर मंदिर में जया किशोरी ने पहुंचकर सबसे पहले भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और मंदिर की परंपराओं का पालन करते हुए बाबा का आशीर्वाद लिया।
दर्शन के दौरान उनका शांत और श्रद्धा से भरा भाव साफ दिखाई दे रहा था। वे मंदिर के वातावरण में पूरी तरह डूबी हुई नजर आईं, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।
नंदी हॉल में बैठकर लगाया ध्यान, भक्ति में लीन दिखीं जया किशोरी
महाकाल मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर जया किशोरी ने कुछ समय ध्यान किया। इस दौरान वे पूरी तरह ध्यान की अवस्था में थीं और भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आईं। नंदी हॉल मंदिर का वह स्थान है, जहां भक्त बैठकर शांति से ध्यान करते हैं। जया किशोरी का यहां बैठकर ध्यान लगाना उनके आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है। यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी एक खास अनुभव बन गया।
मंदिर समिति ने किया स्वागत, भक्तों में दिखा उत्साह
दर्शन के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से जया किशोरी का स्वागत किया गया। इस दौरान मंदिर प्रशासन ने उन्हें सम्मानित किया और उनके आगमन पर खुशी जताई।
उनकी एक झलक पाने के लिए मंदिर परिसर में मौजूद कई श्रद्धालु उत्साहित नजर आए। जया किशोरी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके दर्शन के दौरान लोग उन्हें देखने और आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक दिखे।
कौन हैं जया किशोरी?
जया किशोरी आज देश की सबसे लोकप्रिय युवा कथावाचकों में से एक हैं। वे न सिर्फ कथावाचन करती हैं, बल्कि भजन गायिका और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी जानी जाती हैं। उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन शुरू कर दिया था। 9 साल की उम्र में उन्होंने संस्कृत के स्तोत्रों जैसे लिंगाष्टकम और शिव तांडव स्तोत्रम का पाठ करना शुरू किया था। उनकी पहचान ‘श्रीमद्भागवत कथा’ और ‘नानी बाई रो मायरो’ जैसी प्रस्तुतियों से बनी। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिला सम्मान
जया किशोरी को वर्ष 2024 में राष्ट्रीय क्रिएटर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को देखते हुए दिया गया। उनकी सरल भाषा और प्रेरणादायक बातें युवाओं को खास तौर पर आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि वे आज के समय में भक्ति और प्रेरणा का एक बड़ा चेहरा बन चुकी हैं।






