धर्मनगरी उज्जैन में चैत्र माह की नवरात्रि के अंतिम दिन, यानी महाअष्टमी पर, नगर की खुशहाली और समृद्धि की कामना के साथ एक अनूठी और प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के तत्वावधान में गुरुवार को भव्य नगर पूजा का आयोजन होगा, जिसमें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज विशेष रूप से शामिल होंगे। इस पूजा का मुख्य आकर्षण 24 खंबा स्थित माता महामाया और महालाया को मदिरा का भोग लगाना है।
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका उद्देश्य नगर को हर तरह की आपदा और संकट से बचाना है। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए मां मनसा देवी ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष और श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत रविंद्र पुरी महाराज अन्य संत-महंतों और महामंडलेश्वरों के साथ उज्जैन आएंगे।
28 किलोमीटर तक बहेगी मदिरा की अखंड धारा
नगर पूजा की यह यात्रा अपने आप में बेहद खास है। गुरुवार सुबह 8 बजे 24 खंबा माता मंदिर से इसकी शुरुआत होगी। यात्रा में एक कोटवार मिट्टी की हांडी में मदिरा लेकर आगे चलता है और 28 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मदिरा की अखंड धार बहाता है। यह यात्रा शहर के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरती है।
रास्ते में पड़ने वाले प्रमुख देवी और भैरव मंदिरों में नए ध्वज चढ़ाए जाते हैं और प्रतिमाओं को नया चोला अर्पित किया जाता है। कई देवी मंदिरों में पूजन सामग्री के साथ माता को मदिरा का भोग भी लगाया जाता है। यात्रा के दौरान बैंड-बाजों की धुन पर भक्तगण माता के जयकारे लगाते हुए चलते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यात्रा का समापन देर रात 8 बजे अंकपात मार्ग पर स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर होगा।
“यह नगर पूजा एक अति प्राचीन परंपरा है। कोरोना महामारी जैसे संकट काल में भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज ने हरिद्वार से आकर इस परंपरा का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया था।” — डॉ. राहुल कटारिया, प्रबंधक, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
कन्या पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन
अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता डॉ. गोविंद सोलंकी ने जानकारी देते हुए बताया कि 28 किलोमीटर की इस लंबी यात्रा के समापन के बाद बड़नगर रोड स्थित श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यहां पहले कन्याओं का पूजन होगा और उसके बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस भंडारे में सभी अखाड़ों के संत-महंतों के साथ-साथ शहर के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल होंगे।






