मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच मुख्यमंत्री द्वारा की गई 1033 घोषणाओं में से सिर्फ 185 ही पूरी हो सकी हैं। उन्होंने सरकार पर घोषणाओं और जमीनी कामकाज के बीच बड़े अंतर का आरोप लगाया है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उमंग सिंघार ने सुप्रसिद्ध कवि अदम गोंडवी का शेर उद्धृत करते हुए कहा “तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आँकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।” उन्होंने कहा कि यह पंक्तियां मुख्यमंत्री की घोषणाओं की वास्तविक स्थिति को दर्शाती हैं।
मुख्यमंत्री की अधिकांश घोषणाएं अधूरी, उमंग सिंघार ने घेरा
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनकी सरकार की घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि” लगता है मध्य प्रदेश को एक और “घोषणावीर मुख्यमंत्री” मिल गया है। घोषणावीर मुख्यमंत्री रिटर्न।”
कांग्रेस नेता ने विधानसभा में उपलब्ध जानकारी का उद्धरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई कुल घोषणाओं में से लगभग 18 प्रतिशत ही पूरी हो पाई हैं, जबकि 82 प्रतिशत घोषणाएं अब भी अमल में आने का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अधिकांश घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं तो फिर उनका उद्देश्य जनता को लाभ पहुंचाना था या बीजेपी सिर्फ सुर्खियां बटोरना चाहती थी।
विधानसभा के आंकड़ों का हवाला देते हुए किए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कुछ सरकारी विभागों के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया है कि लोक निर्माण विभाग में 144 घोषणाओं में से सिर्फ 4 पूरी हुई हैं। जल संसाधन विभाग में 46 में से 1, पर्यटन विभाग में 39 में से 1, स्वास्थ्य विभाग में 65 में से 6, नगरीय प्रशासन विभाग में 133 में से 12 तथा उद्योग विभाग में 20 में से सिर्फ 2 घोषणाएं पूरी हो सकीं। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
बता दें कि विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच मुख्यमंत्री द्वारा कुल 1033 घोषणाएं दर्ज की गईं। इनमें से 185 को पूर्ण बताया गया है, जबकि 848 घोषणाएं विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख विभागों में घोषणाओं की संख्या अधिक है, लेकिन उनपर उस गति से अमल होता कम दिख रहा है। कांग्रेस नेता ने इन आंकड़ों को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी सरकार को घेरा है।






