मध्य प्रदेश के किसानों के लिए काम की खबर है। ‘ई-विकास 2.0’ (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। इसके तहत किसानों को टोकन, ऑनलाइन अनुमति, व्हाट्सऐप बॉट और हेल्पलाइन जैसी सुविधाओं से खाद मिलने में मदद मिलेगी।
इसके जरिए किसानों को अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार उर्वरक खरीदने का मौका मिलेगा। यदि कोई किसान ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे निरस्त करना चाहता है, तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद टोकन निरस्तीकरण का विकल्प भी पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया गया है।
दरअसल, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा ‘ई-विकास 2.0’ प्रणाली को पूरे राज्य में क्रियान्वित किया गया है। राज्य के समस्त डबल लॉक केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), एमपी एग्रो तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से अब इसी आधुनिक व्यवस्था के अंतर्गत उर्वरक (खाद) का विक्रय सुनिश्चित किया जा रहा है।
खास बात ये है कि कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा विभिन्न किसान संगठनों, निजी विक्रेताओं तथा प्रमुख स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त व्यावहारिक सुझावों को समाहित करते हुए इस नवीन पोर्टल को बनाया गया है। विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर नई व्यवस्था का प्रचार-प्रसार करने तथा किसानों को इसका लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।
किस तरह मिलेगा लाभ
- ई-विकास 2.0 प्रणाली के माध्यम से किसानों को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप बिना किसी बंधन के उर्वरक क्रय करने की पूर्ण छूट प्रदान की गई है।
- किसान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसलवार अनुशंसित मात्रा अथवा उससे अधिक उर्वरक प्रथम बार में ही प्राप्त कर सकेंगे।
- अतिरिक्त उर्वरक की माँग के लिए पूर्व में प्रचलित 50 शब्दों के विवरण की बाध्यता को समाप्त कर ड्रॉप-डाउन चयन की सुविधा जोड़ी गई है।
- भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की गणना अब सीधे प्रति हैक्टेयर बैग के रूप में प्रदर्शित की जा रही है।
- फसल क्षति अथवा अन्य आपात स्थितियों में किसानों द्वारा पुनः उर्वरक की मांग के लिये एक्सेप्शनल हैंडलिंग प्रणाली को भी प्रभावी बनाया गया है।
- सभी प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अथवा तहसीलदार द्वारा 48 घंटे की निर्धारित समयावधि के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदन प्रदान किया जाएगा।
- यदि कोई किसान ई-टोकन जनरेट करने के बाद उसे निरस्त करना चाहता है, तो टोकन जारी होने के 24 घंटे बाद टोकन निरस्तीकरण का विकल्प भी पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया गया है।
व्हाट्सएप चैटबॉट से कर सकेंगे उर्वरक की बुकिंग
व्हाट्स ऐप चैटबॉट (WhatsApp Chatbot Fertilizer) के माध्यम से अब किसान उर्वरक बुकिंग कर सकेंगे । इसके अंतर्गत किसान केवल अपने मोबाइल से व्हाट्सऐप पर ‘हेल्प’ अथवा ‘मदद’ लिखकर उर्वरक टोकन, अधिकृत रिटेलर, उर्वरक उपलब्धता, उठाव तिथि एवं टोकन की वैधता संबंधी संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर सुगमता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने के लिये आवश्यकतानुसार क्षमता वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है। यह सुविधा जल्द शुरु की जाएगी।
हेल्पलाइन नंबर
- किसानों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर +91-7880223344 एक्टिव किया गया है, जिस पर प्रत्येक शासकीय कार्य दिवस में सुबह 10:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक संपर्क किया जा सकता है।
- प्रदेश में 20 अगस्त 2026 से एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी किसानों की ‘फार्मर आईडी’ निर्मित करना, अग्रिम उर्वरक उठाव को प्रोत्साहित करना तथा पैक्स की सदस्यता का विस्तार करना है।
प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध
- राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी जिलों में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त एवं निर्बाध भंडारण उपलब्ध है। चालू खरीफ वर्ष में 1 अप्रैल से अब तक यूरिया की कुल उपलब्धता 17.57 लाख मीट्रिक टन रही है, जिसमें से 13.18 लाख मीट्रिक टन का उठाव कृषकों द्वारा किया जा चुका है तथा 4.39 लाख मीट्रिक टन यूरिया वर्तमान में उपलब्ध है।
- डीएपी एवं एनपीके की उपलब्धता 11.43 लाख मीट्रिक टन रही, जिसमें से 7.23 लाख मीट्रिक टन के उठाव के बाद 4.20 लाख मीट्रिक टन का समृद्ध स्टॉक शेष है। इसके अतिरिक्त, 3.17 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) भी प्रदेश में वितरण के लिये पूरी तरह उपलब्ध है।






