अनुराग शर्मा/सीहोर: देश को डिजिटल इंडिया बनाया जा रहा है। न्यू इंडिया बनाने का सपना दिखाया जा रहा है लेकिन आजादी के 71 साल बाद भी सीहोर के नसरुल्लागंज ब्लाक के कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। साल बदल गया, सरकार बदल गई लेकिन गांव का हाल नहीं बदला तस्वीरें जस की तस हैं। लोगों को आज भी सड़क नसीब नहीं है और जो सड़क थी भी वो तलाबों में तब्दील हो गई। देश के भविष्य कहे जाने वाले स्कूली छात्र कीचड़, पानी को पारप करते हुए स्कूल पहुंचते है। ग्रामीणों का आरोप है कि न सड़क है, न नाली है और तो और गांवों में शौचालय भी नहीं बनवाए गए प्रधानमंत्री आवास स्कूली बच्चों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है वहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत को खुले कई महीने हो गए हैं लेकिन सरपंच सचिव द्वारा कभी भी ग्राम पंचायत को नहीं खोला जा रही है … 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व होने के बावजूद ना तो सचिव द्वारा ग्राम सभा की बैठक रखी गई ना ही मुनादी कराई गई. जैसे ही इस मामले की शिकायत जिला पंचायत सीईओ अरूण विश्वकर्मा को गई मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने तत्काल एक जाँच कमेटी का गंठन किया और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध कार्रवाही की जाएगी।
आज भी हैं ऐसे गांव जहां कभी नहीं खुलते ग्राम पंचायत, ग्रामीणों ने कहा सरपंच किसी की नहीं सुनता
Written by:Gaurav Sharma
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इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






