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MP में 51 शिक्षकों की फर्जी डिग्री मामले पर जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, पूछा “20 साल तक कैसे चली नौकरी”

फर्जी डिग्री के आरोपों में घिरे शिक्षक अपने सेवाकाल में 100 करोड़ रुपये से अधिक वेतन ले चुके हैं। कांग्रेस ने इतने लंबे समय तक उनकी सेवाएं जारी रहने पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
Jitu Patwari PC

Jitu Patwari

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में फर्जी डीएड-बीएड डिग्री और मार्कशीट के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले 51 शिक्षकों के मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर की तैयारी है, जबकि वे लगभग 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कई शिक्षक पदोन्नति भी पा चुके हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इन शिक्षकों का मौजूदा मासिक वेतन 50 हजार से एक लाख रुपये तक है। विभाग उनके पूरे सेवाकाल में मिले वेतन की गणना कर रहा है और अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक यह राशि 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने इस मामले को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल किए हैं।

क्या है मामला

यह मामला वर्ष 2006-07 में सांवेर में हुई संविदा शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। उस समय मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सत्ता में थी। मामले की शिकायत वर्ष 2021 में सामने आई थी। इसके बाद शिक्षकों की डीएड और बीएड की मार्कशीट और डिग्रियों का सत्यापन कराया गया।

जांच के दौरान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के रिकॉर्ड में कई मार्कशीट जारी नहीं होने की बात सामने आई। कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर किसी दूसरे अभ्यर्थी की मार्कशीट मिली। चार प्रधानाचार्यों की समिति ने जांच के बाद मई 2024 में रिपोर्ट सौंपी। भोपाल एसटीएफ की जांच में भी संबंधित डिग्रियों के फर्जी होने की बात सामने आई है। इस मामले में 51 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है, जबकि 23 अन्य संदिग्ध शिक्षकों से पूछताछ जारी है। लोकायुक्त ने कुल 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड भी मांगा है। जांच में सांवेर, चंद्रावतीगंज, दकाच्या, मंगलिया, धरमपुरी और अज्नोद के सरकारी स्कूलों से जुड़े शिक्षक शामिल हैं।

कांग्रेस ने किए सवाल 

इस पूरे मामले को लेकर जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षक लगभग 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और इनमें से कई को पदोन्नति भी मिल चुकी है। कांग्रेस नेता ने इस मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है। उन्होंने सवाल किया कि जब दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी सामने आ चुकी थी तो इतने लंबे समय तक संबंधित लोग सरकारी सेवा में कैसे बने रहे। उन्होंने कहा कि 25 साल का जनादेश लेकर सत्ता में बैठी भाजपा में सिर्फ दो बदलाव हुए हैं..पहले “घोषणा सत्ता” थी और अब “खटारा सरकार” है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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