मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों से बच्चों के ड्रॉपआउट को लेकर जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने मध्यप्रदेश को “लापता प्रदेश” बना दिया है और सरकारी स्कूलों से बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में पहले “लाड़ली बहनों के लापता होने” की चर्चा होती रही और अब सरकारी स्कूलों से बच्चे भी लापता हो रहे हैं। विधानसभा में इस बाबत पूछे गए प्रश्न पर सरकार के उत्तर से जानकारी मिली है कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई छोड़ दी है। इसे लेकर अब कांग्रेस प्रदेश सरकार पर हमलावर है।
दस साल में 22 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी
जीतू पटवारी ने कहा है कि पिछले 10 सालों में सरकारी स्कूलों से 22 लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जिससे नामांकन में भारी गिरावट आई है। उन्होंने इसे सरकार की शिक्षा नीति की पूरी नाकामी करार देते हुए दावा किया कि जहां दुनिया के विकसित देशों में बच्चे अंतरिक्ष और मंगल ग्रह पर पानी की खोज कर रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, ब्लैकबोर्ड, किताबें और ठीक-ठाक भवन ढूंढने को मजबूर हैं।
जीतू पटवारी ने सरकार से किए सवाल
बता दें कि विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जानकारी दी है कि 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक के स्टूडेंट्स के नामांकन में 22.03 लाख की कमी आई है। इसे लेकर पिछले साल मई में सरकार ने अटल बिहारी सुशासन संस्थान को पत्र लिखकर नामांकन मे गिरावट की वैज्ञानिक जांच करने को कहा था। लेकिन लगभग दस महीने बीत जाने पर भी संस्थान की तरफ से इसे लेकर कोई एक्शन प्लान प्रस्तुत नहीं किया गया है जबकि इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग उन्हें रिमाइंडर भी दे चुका है। इसी मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन बच्चों को “लापता” की श्रेणी में रखते हुए सरकार से सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ‘प्रदेश में लाड़ली बहनें लापता होने के बाद अब स्कूल के बच्चे भी लापता हो रहे हैं।’






