मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में बच्चों और महिलाओं के पोषण को लेकर सामने आए आंकड़ों के आधार पर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कुपोषण अब सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि सरकार की प्रशासनिक विफलता और संवेदनहीनता का प्रमाण बन चुका है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद हैं और नई व्यवस्था के लिए अब तक टेंडर भी नहीं हुए हैं। प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनवाड़ियों में बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को साल में 300 दिन पोषण आहार दिया जाना चाहिए लेकिन जुलाई तक करीब 170 दिन ही नियमित पोषण आहार मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह बच्चों के हिस्से का लगभग 130 दिन का पोषण आहार गायब है।
NFHS-6 के आंकड़ों का हवाला देकर सरकार को घेरा
जीतू पटवारी ने NFHS-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की तुलना में मध्यप्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। उनके मुताबिक, देश में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अंडरवेट की दर 31.8 प्रतिशत, वेस्टिंग 19 प्रतिशत और स्टंटिंग 29.3 प्रतिशत है। वहीं मध्यप्रदेश में ये आंकड़े क्रमश: 39.7 प्रतिशत, 23.8 प्रतिशत और 31.4 प्रतिशत हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि NFHS-5 से NFHS-6 के बीच देश में अंडरवेट और वेस्टिंग के आंकड़ों में सुधार हुआ, लेकिन मध्यप्रदेश में स्थिति बिगड़ी है। प्रदेश में अंडरवेट बच्चों का प्रतिशत 33 से बढ़कर 39.7 प्रतिशत और वेस्टिंग 18.9 से बढ़कर 23.8 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण मध्यप्रदेश में अंडरवेट बच्चों की दर करीब 42 प्रतिशत बताई गई है।
सरकार के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
जीतू पटवारी ने कहा कि वर्ष 2025 में विधानसभा में सरकार ने प्रदेश में लगभग 1.36 लाख कुपोषित बच्चों की जानकारी दी थी। इनमें लगभग 29,830 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित और करीब 1.06 लाख बच्चे मध्यम रूप से कुपोषित बताए गए थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की गंभीर एवं मध्यम कुपोषण दर 7.79 प्रतिशत बताई गई थी, जो राष्ट्रीय औसत 5.40 प्रतिशत से अधिक है।
उन्होंने पोषण के लिए निर्धारित राशि पर भी सवाल उठाया और कहा कि आंगनवाड़ियों में कुपोषित बच्चों के लिए 8 रुपये प्रतिदिन और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए 12 रुपये प्रतिदिन का प्रावधान है। वहीं, गौशालाओं में एक गाय के आहार के लिए 40 रुपये प्रतिदिन निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार एक गाय के आहार पर 40 रुपये खर्च कर सकती है, तो कुपोषित बच्चे के भोजन पर 8 रुपये और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे पर 12 रुपये ही क्यों?
‘बच्चों का पोषण सरकार की प्राथमिकता नहीं’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पोषण 2.0 और पोषण अभियान जैसी योजनाओं का प्रचार तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण आहार उपलब्ध नहीं करा पा रही है। उन्होंने बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, उमरिया और श्योपुर सहित आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति को विशेष रूप से चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि सातों पोषण आहार प्लांट बंद हैं, नई व्यवस्था का टेंडर नहीं हुआ और आंगनवाड़ियों में 300 दिन के बजाय करीब 170 दिन ही पोषण आहार मिला, जबकि इसी दौरान बच्चों में अंडरवेट और वेस्टिंग के आंकड़े बढ़े हैं।
सरकार से पूछे ये सवाल
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और महिला एवं बाल विकास विभाग से सवाल किए। उन्होंने पूछा है कि:
- बच्चों को 300 दिन पोषण आहार दिया जाना तय है तो 170 दिन ही क्यों दिया गया।
- सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद क्यों हैं।
- नई व्यवस्था के लिए अब तक टेंडर क्यों नहीं हुआ।
- बच्चों के हिस्से के 130 दिन के पोषण आहार की भरपाई कौन करेगा।
- कुपोषित बच्चों के लिए 8 और गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए 12 रुपये में पौष्टिक भोजन कैसे उपलब्ध होगा।
- पोषण के लिए अतिरिक्त राशि की मांग कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से क्यों बच रही है।
पोषण चाहिए या भाषण
उन्होंने ने कहा कि सरकार को जवाब देना होगा कि “मध्यप्रदेश के बच्चों को पोषण चाहिए या सिर्फ भाषण?” उन्होंने कहा कि यह डबल इंजन की सरकार नहीं, बच्चों के पोषण पर डबल विफलता की सरकार है।” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के मुद्दे पर सरकार को विधानसभा से लेकर सड़क तक जवाबदेह बनाएगी और सभी पोषण आहार केंद्र तत्काल शुरू कर 300 दिन का पोषण आहार सुनिश्चित करने की मांग करेगी।






