मध्यप्रदेश में मेडिकल ऑफिसर भर्ती-2024 की पदस्थापना प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भर्ती में मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के साथ पदस्थापना के दौरान रूप से भेदभाव किया गया। उन्होंने कहा कि यदि अभ्यर्थियों के आरोप सही हैं तो यह युवाओं की मेहनत और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मेडिकल ऑफिसर भर्तीका परिणाम दस जून को घोषित किया गया था। इसके बाद शीर्ष रैंक प्राप्त लगभग 35 अभ्यर्थियों से उनकी पसंद के अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का विकल्प भरवाया गया। आरोप है कि बाद में 25 जून को जारी पदस्थापना आदेश में बिना किसी पूर्व सूचना के कई अभ्यर्थियों की पसंद और मेरिट की अनदेखी करते हुए कम रैंक वाले उम्मीदवारों को बेहतर अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र आवंटित कर दिए गए। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस मामले पर जांच की मांग की है।
क्या है मामला
मध्यप्रदेश की मेडिकल ऑफिसर भर्ती-2024 में चयनित डॉक्टरों की पदस्थापना को लेकर विवाद सामने आया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि दस जून को परिणाम घोषित होने के बाद स्वास्थ्य संचालनालय ने लगभग 35 चयनित अभ्यर्थियों से उनकी पसंद के अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों के विकल्प भरवाए थे। इसके बाद 11 जून को प्रारंभिक पोस्टिंग आदेश जारी किए गए।अभ्यर्थियों का आरोप है कि 25 जून को बिना किसी सार्वजनिक सूचना के संशोधित पदस्थापना आदेश जारी कर कई डॉक्टरों की पोस्टिंग बदल दी गई। उनका कहना है कि मेरिट सूची में ऊपर होने के बावजूद उन्हें उनकी पहली या दूसरी पसंद नहीं मिली, जबकि उनसे कम रैंक वाले कुछ अभ्यर्थियों को पसंदीदा अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र आवंटित कर दिए गए। इसी को लेकर कई चयनित डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग को लिखित शिकायत भेजी है। कुछ डॉक्टरों ने अभी तक जॉइनिंग नहीं की है, जबकि कुछ ने पदस्थापना प्रक्रिया को चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है। उनका आरोप है कि पोस्टिंग प्रक्रिया में मेरिट और पारदर्शिता का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
उमंग सिंघार ने की जांच की मांग
इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी मामले को उठाते हुए प्रदेश सरकार से पूछा है कि पदस्थापना का आधार मेरिट था या कोई अन्य मापदंड। उन्होंने कहा है कि यदि मेरिट सूची में आगे रहने वाले अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के अनुरूप पदस्थापना नहीं मिली और कम रैंक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा है कि पदस्थापना का आधार मेरिट था या कोई अन्य मापदंड। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि अभ्यर्थियों की पोस्टिंग में बदलाव किस आधार पर किया गया। कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।






