सीहोर। अनुराग शर्मा। सीहोर 21 दिन की देशबन्दी के एलान के बाद आज पुलिस और प्रसाशन की टीम सड़को पर उतरी ओर व्यर्थ घूमने वालो को के साथ सख्ती से पेश आई इस दौरान कई फालतू यहां वहां घूमने वालो को उठक बैठक भी लगावइ और कई को एक पम्पलेट भी थमाया जिस पर लिखा था कि में समाज का दुश्मन हु और मै घर पर नही रहूंगा। इस दौरान कई लोगो को समझाइश भी दी गई और कोरोना वायरस के खतरे के प्रति आगाह भी किया गया। कोरोना वायरस की आशंका के चलते लॉक डाउन के बावजूद लोग शहर में घूमने से बाज नहीं आ रहे हैं। दोपहर तक निर्धारित समय के बाद भी 2 दिनों से सड़कों पर लोगों की आवाजाही बरकरार चल रही है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया सुबह से दोपहर तक पुलिसकर्मी लोगों को सड़कों पर ना घूमने के लिए समझाते रहे पुलिसकर्मियों ने नियम ना मानने वाले लोगों को अपने तरीके से समझाया शुरुआत में अनूठा तरीका अपनाते हुए, कोतवाली चौराहे पर पुलिसकर्मियों ने सड़क पर घूमने वालों के हाथ में समाज का दुश्मन हूं मैं घर पर नहीं रहूंगा। लिखे पोस्टर हाथ मैं देकर उनके फोटो वायरल कराएं इसके बाद कोतवाली चौराहा रेलवे स्टेशन परिसर सहित अन्य स्थानों पर घूमने वाले लोगों पर पुलिस ने डंडे भी चलाएं बार-बार समझाई इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं करने पर पुलिसकर्मियों ने बड़ा बाजार कोतवाली चौराहा सहित अन्य स्थानों पर वाहन चालकों से उठक बैठक भी लगवाए इसके अलावा यातायात पुलिस ने 3 वाहनों के चालान भी बनाएं इन वाहनों के चालकों से ₹500 का जुर्माना वसूल लिया गया।
प्रशासन ने दिखाई सख्ती, व्यर्थ घूमने वालों को लगवाई उठक बैठक
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






