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MP Police: वर्दी में Reels बनाई तो माना जाएगा कदाचार, सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर DGP मकवाणा की लक्ष्मण रेखा

मध्य प्रदेश पुलिस के लिए DGP कैलाश मकवाना ने जारी किए सोशल मीडिया इस्तेमाल के नए निर्देश; वर्दी में Reels को माना जाएगा कदाचार, बिना अनुमति सोशल मीडिया से कमाई और पैसे लेकर प्रचार पर रोक, गोपनीय दस्तावेज ChatGPT-Gemini पर भी नहीं डाल सकेंगे
DGP Kailash Makwana

भोपाल। वर्दी में Reels बनाने से लेकर सोशल मीडिया से कमाई करने तक, मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अब नियम और स्पष्ट कर दिए गए हैं। DGP कैलाश मकवाना ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं, जिनमें वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो पोस्ट करने को कदाचार और अनुशासन के खिलाफ माना गया है। पुलिसकर्मियों से पहले से पोस्ट ऐसी सामग्री भी हटाने के लिए कहा गया है।

सोशल मीडिया पर सक्रिय पुलिसकर्मियों के लिए सबसे अहम निर्देशों में कमाई से जुड़ा नियम भी है। बिना सरकार की अनुमति के वे सोशल मीडिया के जरिए पैसे नहीं कमा सकेंगे और न ही किसी कंपनी, प्रोडक्ट, सर्विस या कारोबार का पैसे लेकर प्रचार कर सकेंगे। यह नियम केवल पुलिसकर्मी तक सीमित नहीं रहेगा। उनके परिवार के किसी सदस्य के सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी कमाई हो रही है तो उसकी जानकारी भी विभाग को देनी होगी। इसके लिए 30 दिन का समय दिया गया है।

DGP के निर्देशों में सोशल मीडिया के साथ AI टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्क किया गया है। गोपनीय या सुरक्षा से जुड़े सरकारी दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर शेयर करने की मनाही तो रहेगी ही, उनके स्कैन या स्क्रीनशॉट ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल्स पर भी अपलोड नहीं किए जा सकेंगे। संवेदनशील ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी अपनी तैनाती की जगह और जिम्मेदारी भी सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे।

इसी गोपनीयता को VIP-VVIP सुरक्षा से लेकर पुलिस की मैदानी कार्रवाई तक लागू किया गया है। महत्वपूर्ण जगहों पर तैनात पुलिसकर्मी वहां की फोटो या सेल्फी पोस्ट नहीं कर सकेंगे। हथियारों की ट्रेनिंग, ड्रिल, चांदमारी और दबिश जैसी कार्रवाई के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर डालने या उसका लाइव प्रसारण करने पर भी रोक रहेगी। जांच के दौरान पुलिस किन तरीकों और तकनीकों का इस्तेमाल करती है, इसकी जानकारी भी बिना अनुमति सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी।

पीड़ित और जांच से जुड़ी जानकारी भी सोशल मीडिया से रहेगी दूर

पुलिस के कामकाज से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालते समय भी अब कई बातों का ध्यान रखना होगा। किसी शिकायत, जांच या जनसुनवाई के दौरान पीड़ित, गवाह, शिकायत करने वाले व्यक्ति या आरोपी के फोटो-वीडियो सीधे पोस्ट नहीं किए जा सकेंगे। जरूरत होने पर पहले अनुमति लेनी होगी और संबंधित व्यक्ति का चेहरा छिपाना होगा।

रेप या यौन हिंसा की शिकार महिला और बच्चियों की पहचान किसी भी तरह सोशल मीडिया पर उजागर नहीं की जा सकेगी। बच्चों से जुड़े मामलों में भी उनकी पहचान सामने लाने वाली तस्वीर, वीडियो या जानकारी पोस्ट नहीं कर सकेंगे। वहीं किसी अपराध की जांच चल रही है या मामला कोर्ट में है तो उससे जुड़ी ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक रहेगी, जिससे जांच या कोर्ट में चल रहे मामले पर असर पड़ सकता हो। जब्त हथियार और दूसरी चीजों की तस्वीरें भी उन्हें सील करने से पहले पोस्ट नहीं की जा सकेंगी।

DGP के निर्देशों के अनुसार सोशल मीडिया पर संदिग्ध, असामाजिक छवि या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों से भी पुलिसकर्मी दूरी रखेंगे। ऐसे लोगों की Friend Request स्वीकार नहीं कर सकेंगे, न उन्हें Follow या उनके साथ Collaborate कर सकेंगे। ऐसे लोगों के साथ फोटो-वीडियो या दूसरी सामग्री शेयर करने पर भी रोक रहेगी।

वर्दी और पुलिस की पहचान के निजी इस्तेमाल को लेकर भी इसी तरह की सख्ती रहेगी। पुलिसकर्मियों के परिवार या दोस्त वर्दी, सरकारी वाहन और हथियारों का इस्तेमाल सोशल मीडिया के लिए नहीं कर सकेंगे। वहीं पुलिसकर्मी अपनी DP पर किसी राजनीतिक दल या संगठन का निशान नहीं लगा सकेंगे। सोशल मीडिया के जरिए सांकेतिक विरोध करने और बिना अनुमति सरकारी अकाउंट से ऑनलाइन वोटिंग या पोल में हिस्सा लेने पर भी रोक लगाई गई है।

सोशल मीडिया पर विभागीय नाराजगी जाहिर करने पर रोक

सोशल मीडिया पर अपनी नौकरी या विभाग से जुड़ी नाराजगी जाहिर करने की भी छूट नहीं होगी। सेवा से जुड़ी शिकायत पुलिसकर्मियों को अपने वरिष्ठ अधिकारी के सामने रखनी होगी। सरकार की नीतियों और विभाग के कामकाज की आलोचना करने के साथ वरिष्ठ अधिकारियों या साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ गरिमा के विपरीत टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। गलत या बिना पुष्टि वाली जानकारी पर प्रतिक्रिया देने से भी बचना होगा।

ड्यूटी के दौरान बेवजह सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर भी रोक रहेगी। निजी सोशल मीडिया अकाउंट के लिए सरकारी CUG सिम, इंटरनेट, वाई-फाई, आईपी एड्रेस या सरकारी ई-मेल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। निजी मोबाइल में विभाग का सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट भी लॉगिन नहीं कर सकेंगे।

DGP कैलाश मकवाना की ओर से जारी इन निर्देशों में मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965, पुलिस रेगुलेशन के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की सोशल मीडिया से जुड़ी गाइडलाइन का भी हवाला दिया गया है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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