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MP के स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, नए सत्र से शिक्षकों को मिलेगी यह जिम्मेदारी

Written by:Pooja Khodani
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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (MP) का स्कूल शिक्षा विभाग (schoool education department) जल्द ही सरकारी स्कूलों (Government School) के शिक्षकों को बड़ी जिम्मेदारी देने वाला है। इसके तहत शिक्षकों (Teacher) को स्वास्थ्य दूत बनाया जाएगा, जो विद्यार्थियों (Student) को कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से रोकथाम और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे।इसकी शुरुआत नए शैक्षणिक सत्र 2021-22 अप्रैल से की जा सकती है।

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दरअसल, अभी कक्षा 1 से 8वीं तक के स्कूल (School) बंद है और 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं(MP Board Exams) भी चल रही है। ऐसे में हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 अप्रैल से नए सत्र का शुभारंभ करने का फैसला किया है, तभी पहली से आठवीं तक के स्कूलों को भी खोला जाएगा, हालांकि अभी तक लिखित में आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में देश-प्रदेश में बढ़ते कोरोना (Coronavirus) को देखते स्कूल शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र (National Health Mission MP)  द्वारा स्कूलों में स्कूल हेल्थ कार्यक्रम चलाए जाने का फैसला लिया गया है।

इस कार्यक्रम में प्रत्येक सरकारी स्कूल में दो शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर(Health and Wellness Ambassador)  के रूप में चुना गया है। इनका काम रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी प्रसारित करना होगा।  इसके तहत पहले शिक्षकों को कोरोना और अन्य बिमारियों को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा जो कि 25 मार्च से शुरु होगा। इसमें शिक्षकों को कोरोना से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरती जाएं और स्वच्छता का कैसे ध्यान रखा जाए, इस संबंध में जानकारी दी जाएगी।

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इसके बाद ये सभी शिक्षक सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा।खास बात तो ये है कि ये शिक्षक इस काम में कक्षा प्रतिनिधियों से भी सहयोग लेंगे, जो हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर संदेशवाहक कहे जाएंगे। ये कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे।

विभाग ने इन विषयों को शामिल किया है

कोरोना संक्रमण से बचाव, स्वस्थ होना, भावनात्मक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य, अंतरव्यैक्तिक संबंध मूल्य, लैंगिक समानता, पोषण आहार, स्वस्थ और साफ-सफाई, स्वस्थ जीवनशैली का प्रोत्साहन, प्रजनन स्वास्थ्य सहित अन्य विषय शामिल किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विशेषज्ञों द्वारा शिक्षकों को इन विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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