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ब्यावरा से भोपाल तक सफर होगा तेज और सुरक्षित, 106 किमी फोरलेन हाईवे को मिलेगी नई शक्ल

Written by:Bhawna Choubey
Published:
मध्य प्रदेश में सड़क यात्रा को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजगढ़ के ब्यावरा से भोपाल को जोड़ने वाले एनएच-46 फोरलेन को अब नए सिरे से बनाया जाएगा। तकनीकी खामियां दूर होंगी और जलभराव की समस्या खत्म करने पर खास ध्यान रहेगा।
ब्यावरा से भोपाल तक सफर होगा तेज और सुरक्षित, 106 किमी फोरलेन हाईवे को मिलेगी नई शक्ल

मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम फैसला लिया गया है। ब्यावरा से भोपाल को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-46 अब पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया जाएगा। यह वही फोरलेन है, जिस पर सफर करने वाले लोग लंबे समय से खराब सड़क, जलभराव और तकनीकी खामियों से परेशान थे।

सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से नई डीपीआर तैयार कर ली है। जैसे ही केंद्र से मंजूरी मिलेगी, वैसे ही इस 106 किलोमीटर लंबे फोरलेन हाईवे के दोबारा निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

नए सिरे से क्यों बन रहा है ब्यावरा-भोपाल फोरलेन

ब्यावरा से भोपाल तक का एनएच-46 फोरलेन पहले भी बनाया गया था। साल 2019-20 में करीब 1087 करोड़ रुपये की लागत से इस हाईवे का निर्माण हुआ था, लेकिन शुरुआत से ही इसमें कई खामियां सामने आने लगीं। निर्माण के दौरान अनियमितताओं के चलते तीन ठेकेदार बदले गए।

हर नए ठेकेदार ने अधूरे काम को जैसे-तैसे पूरा करने पर ध्यान दिया, जिससे सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हुई। कई जगह फोरलेन जमीन के स्तर से नीचे बन गया, जिससे बारिश के मौसम में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा होने लगी। यही वजह है कि अब इस पूरे मार्ग को सुधारने की बजाय नए सिरे से बनाने का फैसला लिया गया है।

106 किलोमीटर लंबे फोरलेन में क्या-क्या बदलेगा

नई योजना के तहत ब्यावरा से भोपाल तक कुल 106 किलोमीटर लंबे फोरलेन हाईवे का निर्माण होगा। इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा गया है। ब्यावरा से नरसिंहगढ़ तक के हिस्से पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि नरसिंहगढ़ से भोपाल तक के हिस्से पर भी लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

इस बार सड़क की ऊंचाई और पानी निकासी पर खास ध्यान दिया गया है। ब्यावरा से नरसिंहगढ़ के बीच सड़क की ऊंचाई 3 से 4 फीट तक बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही हर एक किलोमीटर पर पुलिया बनाई जाएगी, ताकि बारिश के समय पानी सड़क पर जमा न हो। नरसिंहगढ़ से भोपाल के बीच डामर वाली सड़क का पूरा हिस्सा नए सिरे से डामरीकरण किया जाएगा।

जलभराव और सुरक्षा को लेकर क्या होंगे नए इंतजाम

इस फोरलेन हाईवे पर जलभराव सबसे बड़ी समस्या रही है। कई जगह बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाता था, जिससे हादसों का खतरा बना रहता था। नई डीपीआर में इस समस्या को जड़ से खत्म करने की कोशिश की गई है।

सड़क के साथ-साथ अंडरपास और पुलों पर भी अलग से काम किया जा रहा है। करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से पांच जगह अलग-अलग अंडरपास और ब्रिज बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा सागपुर अंडरपास पर अकेले 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे न सिर्फ पानी निकासी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सुरक्षित और आसान बनेगी।

फोरलेन बनने से क्षेत्र के विकास को मिलेगी रफ्तार

सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ होती है। ब्यावरा-भोपाल एनएच-46 के नए सिरे से बनने से राजगढ़ और आसपास के जिलों को सीधा फायदा मिलेगा।
अच्छी सड़क कनेक्टिविटी से उद्योग, पर्यटन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी तेजी आती है। भोपाल जैसे बड़े शहर से बेहतर जुड़ाव होने पर छोटे शहरों और कस्बों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं। यह फोरलेन हाईवे आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास की मजबूत नींव बन सकता है।