मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को मुंबई में आयोजित ‘मुंबई क्लाइमेट वीक-2026’ में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्लाइमेट चेंज को मानव अस्तित्व, आर्थिक स्थिरता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी गंभीर वैश्विक चुनौती करार देते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन ही सतत प्रगति का मूल आधार है।
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन एनर्जी के लिए विख्यात सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। सरकारके अनुसार यह समझौता राज्य में हरित ऊर्जा विकास को नई गति प्रदान करने वाला कदम साबित होगा।
मुंबई क्लाइमेट वीक में मुख्यमंत्री ने दिया विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का संदेश
‘मुंबई क्लाइमेट वीक’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन का समाधान किसी एक देश, राज्य या सरकार के प्रयासों से नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मुंबई क्लाइमेट वीक को ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और जलवायु समाधान के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए त्वरित एवं सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, हरित तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को भविष्य के विकास का मार्ग बताया। उन्होंने ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ जैसे व्यवहारिक बदलाव अपनाने की अपील करते हुए कहा कि पृथ्वी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सरकारों के साथ-साथ उद्योगों, संस्थाओं और हर नागरिक की भी है।
सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के साथ एमओयू साइन
इसी अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग और अमेरिका स्थित जलवायु निवेश संस्था Sequoia Climate Foundation के बीच मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह फाउंडेशन वैश्विक स्तर पर डीकार्बोनाइजेशन और जलवायु समाधान परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए जानी जाती है।
नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां बताई
डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की प्रमुख उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य भारत के उन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जिन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति लागू की, जो क्लाइमेट चेंज से निपटने में कारगर कदम साबित हो रही है। राज्य में 300 मेगावाट क्षमता की 4 घंटे और 300 मेगावाट क्षमता की 6 घंटे की सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजनाएं चल रही हैं, साथ ही 24×7 नवकरणीय ऊर्जा के लिए बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं, जो भारत में अपनी तरह की पहली परियोजनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य ने अपनी जरूरतें पूरी करने के बाद पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी है। विशेष रूप से ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है, जिसमें ऊर्जा उत्पादन शुरू हो चुका है और किसी भी नागरिक को विस्थापित नहीं किया गया। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उन्हें मध्यप्रदेश सरकार हरसंभव सहयोग और सुरक्षा प्रदान करेगी।






