Hindi News

मध्यप्रदेश में 556 बच्चों के कथित धर्मांतरण का मामला, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने MP सरकार को भेजा नोटिस, 15 दिन में रिपोर्ट तलब

Written by:Shruty Kushwaha
Published:
NHRC को की गई इस शिकायत में शिकायतकर्ता ने अवैध विदेशी फंडिंग और राष्ट्र-विरोधी तत्वों की संलिप्तता का आरोप भी लगाया है। अब आयोग ने एमपी के स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर पंद्रह दिन में कार्रवाई रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह सवाल उठाया है कि जब मदरसे स्कूल की श्रेणी में नहीं आते और शिक्षा का अधिकार कानून के दायरे से बाहर हैं तो आखिर बच्चों को वहां कैसे पढ़ाया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में 556 बच्चों के कथित धर्मांतरण का मामला, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने MP सरकार को भेजा नोटिस, 15 दिन में रिपोर्ट तलब

Alleged Conversion

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग को एक पत्र लिखकर 556 हिंदू बच्चों के कथित धर्मांतरण की शिकायत पर जवाब मांगा है। शिकायत में कहा गया है कि मुरैना, इस्लामपुरा, जौरा, पौरसा, अंबाह, कैलारस, संबलगढ़ जैसे इलाकों में 27 गैर-कानूनी मदरसों में इन बच्चों को दाखिल कर उन्हें इस्लाम की शिक्षा दी जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है।

शिकायतकर्ता ने आयोग को की शिकायत में कहा है कि मध्यप्रदेश के इन स्थानों पर बिना सरकारी अनुमति के बच्चों को कुरान और हदीस की शिक्षा दी जा रही है। इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

एमपी के इन मदरसों में धर्मांतरण का आरोप

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 24 सितंबर 2025 को प्राप्त शिकायत में आरोप लगाया गया कि मुरैना, इस्लामपुरा, जौरा, पौरसा, अंबाह, कैलारस, संबलगढ़ और अन्य क्षेत्रों में ये अनधिकृत मदरसे बिना सरकारी मंजूरी के हिंदू बच्चों को कुरान और हदीस पढ़ा रहे हैं। यह किशोर न्याय अधिनियम, 2015, संविधान के अनुच्छेद 28(3), और मध्य प्रदेश सरकार के 16 अगस्त 2024 के आदेश का उल्लंघन है, जो गैर-इस्लामी बच्चों को इस्लामी मदरसों में पढ़ने से रोकता है। शिकायतकर्ता ने अवैध विदेशी फंडिंग और राष्ट्र-विरोधी तत्वों से संबंधों का भी आरोप भी लगाया है। साथ ही यह दावा किया गया कि एक साल बाद भी सरकार ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।

NHRC ने मध्यप्रदेश सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट

शिकायतकर्ता ने आयोग से मांग की है कि इस मामले में पुलिस केस दर्ज हो, बच्चों को बचाया जाए, मदरसा संचालकों पर कार्रवाई हो और उनपर जांच की जाए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी की पीठ ने इस मामले को मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत दर्ज किया है। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुसार सभी बच्चों को स्कूल में पढ़ना चाहिए, लेकिन मदरसे स्कूल की श्रेणी में नहीं आते और शिक्षा के अधिकार कानून से बाहर हैं। आयोग ने पूछा है कि हिंदू बच्चे इन मदरसों में कैसे पहुंचे। इसी के साथ आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर 15 दिनों में इस मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा है।