भोपाल । देश भर में कहर बरपा रहा कोरोना वायरस के खतरे का असर छात्रों की पढ़ाई पर न पढ़े इसको लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है| कोरोना के खतरे को देखते हुए स्कूलों को बंद किया गया है, इस दौरान अब घर बैठे ही छात्र स्कूल की पढाई कर सकेंगे|
इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सन्देश जारी करते हुए कहा कि नॉवेल कोरोना वाइरस पूरे विश्व के लिए इस सदी की अब तक की शायद सबसे कठिन परीक्षा है। हम यह लड़ाई जीत सकते है अगर हम सोशल डिस्टन्सिंग और अन्य स्वास्थ्य दिशा निर्देशों का पालन करें।
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उन्होंने कहा ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए हमें विद्यालय अवश्य कुछ समय के लिए बंद रखने पड़ें, लेकिन विद्यार्थियों के लिए अध्ययन और शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ा रहना आवश्यक है, जिससे उनकी पढ़ाई पर इस महामारी का कम से कम असर पड़े| DigiLEP – आपकी पढ़ाई आपके घर, इसी उद्देश्य से बनाई गयी योजना है|
DigiLEP प्रोग्राम के अंतर्गत अब से हर रोज़ प्रदेश के सभी पालकों और अध्यापकों को WhatsApp द्वारा शिक्षण सामग्री भेजी जाएगी| इसमें कक्षा 1 से 12 तक के लिए अँग्रेजी, हिंदी, गणित, और विज्ञान आदि विषयों को सम्मिलित किया जाएगा। इसके अंतर्गत अनेकों गतिविधियों और विडियो को देख कर बच्चों को अपने पाठ्यक्रम से जुड़े रहने का अवसर प्राप्त होगा। दैनिक रूप से 10 से 11 बजे के बीच यह शिक्षा सामग्री आपको भेजी जाएगी। सीएम ने कहा सभी अभिभावक गण भी हमारे इस शिक्षा परिवार का अहम हिस्सा हैं| इस नाते आप यह सामग्री अपने बच्चों को अवश्य दिखाएँ एवं उनके विकास में पूरा योगदान दें|
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है।