मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब प्रदेश के किसानों पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि ईरान-इजराइल-संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होने से प्रदेश की कई मंडियों में धान, गेहूं और दालों सहित विभिन्न फसलों के दाम गिर गए हैं। कई जगह किसानों को अपनी उपज की कीमत आधे से भी कम मिल रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
उमंग सिंघार ने किसानों को लेकर जताई चिंता
उमंग सिंघार ने कहा कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिसका सीधा असर भारत के कृषि निर्यात पर पड़ रहा है। वहीं, मध्यप्रदेश जैसे प्रमुख कृषि राज्य में किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं जहां सोयाबीन, चावल, केला और अन्य फसलों के दाम मंडियों में आधे से भी कम पर बिक रहे हैं।
आंकड़ें बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश से लगभग 33,891 करोड़ का कृषि निर्यात हुआ था, जबकि प्रदेश का कुल निर्यात करीब 64,900 करोड़ रहा। इसमें किसानों की मेहनत का बड़ा योगदान है। कृषि निर्यात में प्रमुख हिस्सेदारी सोयाबीन सीड ऑयल, चावल, मांस उत्पाद, मसाले तथा फल-सब्जियों की रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन सीड ऑयल का निर्यात लगभग 5,855 करोड़, चावल 4,000 करोड़, मांस उत्पाद 1,000 करोड़, मसाले 666 करोड़ और फल एवं सब्जियों का निर्यात करीब 250 करोड़ रहा।
सरकार पर लगाए आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गए हैं और लगभग 1,000 करोड़ से अधिक का कृषि माल समुद्री मार्ग में फंसा हुआ है, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है। इस कारण मंडियों में मांग घटने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि संकट की आशंका पहले से होने के बावजूद राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि “आज की स्थिति देखकर स्पष्ट है कि मोदी जी ने इस मुद्दे पर पूरी तरह सरेंडर कर दिया हैं। किसानों की मेहनत और करोड़ों के निर्यात पर संकट के बावजूद सरकार की चुप्पी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”






