मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक दौर की ओर बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग की मानें तो 19 सितंबर के बाद एक और नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिसके असर से प्रदेश में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है।
इससे पहले अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के असर से 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी हिस्से में बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी हिस्से में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताई गई है।
इस दौरान इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग के कई जिलों में भी बादल-बारिश और तेज हवा की स्थिति बन सकती है। नर्मदापुरम, बैतूल, खंडवा, खरगोन, धार, झाबुआ और आलीराजपुर में अच्छी बारिश हो सकती है। मौसम में होने वाले इस बदलाव से तापमान में भी मामूली बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल अधिकतम तापमान करीब 32 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है।
मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 19 सितंबर, 2026 के आसपास परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। वर्तमान में निम्न दबाव का क्षेत्र, चक्रवातीय परिसंचरण, मानसून ट्रफ सक्रिय है। इसके अलावा मध्य भूमध्यसागरीय पश्चिमी हवाओं में ट्रफ के रूप में देखा गया एक नया पश्चिमी विक्षोभ औसत समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊँचाई पर भी स्थित है।
मध्य प्रदेश में अब भी कोटे से 6 % कम बारिश
- 1 जून से 15 सितंबर 2026 तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 6% बारिश कम हुई है। प्रदेश में अबतक 33 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37.3 इंच होनी चाहिए थी। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसूनी सीजन में अब तक सामान्य बारिश का 88.5% कोटा पूरा हो चुका है।
- पूर्वी मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 2% और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 11% कम पानी गिरा है। अबतक प्रदेश के 37 जिलों में बारिश का आंकड़ा कमजोर बना हुआ है और 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिर चुका है।
- इस सीजन में सबसे अधिक मऊगंज में 53 इंच और सबसे कम आलीराजपुर में सिर्फ 13.6 इंच बारिश हुई है
- भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। अन्य जिलों में औसत से भी कम पानी गिरा है।







