भोपाल: पुलिस की वर्दी में दशकों तक गंभीर अपराधों की गुत्थियां सुलझाने वाले एक अनुभवी अधिकारी जब भविष्य के फॉरेंसिक विशेषज्ञों के बीच पहुंचे, तो क्लासरूम का माहौल किसी लाइव इन्वेस्टिगेशन सीन जैसा हो गया। इंस्टीट्यूट फॉर एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन (आईईएचई), भोपाल के फॉरेंसिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एक अतिथि व्याख्यान में पूर्व डीजी (जेल) संजय चौधरी ने छात्रों को किताबी ज्ञान से परे, जांच की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को कानून प्रवर्तन और फॉरेंसिक अन्वेषण के व्यावहारिक पहलुओं की गहरी समझ देना था। संजय चौधरी ने अपने संबोधन में अपराध स्थल प्रबंधन (Crime Scene Management) से लेकर साक्ष्यों और हथियारों के सावधानीपूर्वक संकलन तक हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की।

वास्तविक घटनाओं से समझाया जांच का महत्व
व्याख्यान का सबसे प्रभावी हिस्सा वो था जब संजय चौधरी ने अपने करियर के दौरान संभाले गए गंभीर मामलों के वास्तविक उदाहरण पेश किए। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी सी चूक पूरे केस की दिशा बदल सकती है और कैसे एक सही तरीके से उठाया गया सबूत न्याय दिलाने में निर्णायक साबित होता है। उनके अनुभवजन्य ज्ञान ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि फॉरेंसिक विज्ञान केवल एक अकादमिक विषय नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण रीढ़ है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अंजली आचार्य ने स्वागत भाषण दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर आईईएचई के निदेशक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल तथा रसायन विभाग की डॉ. संध्या त्रिवेदी भी उपस्थित रहीं, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।

छात्रों के सवालों का भी दिया जवाब
सत्र केवल एकतरफा संवाद नहीं रहा। एक इंटरैक्टिव चर्चा के दौरान छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ अपने प्रश्न पूछे। उन्होंने फॉरेंसिक जांच की नैतिकता, दबाव में काम करने की चुनौतियों और करियर की संभावनाओं से जुड़े कई सवाल किए, जिनका संजय चौधरी ने अपने अनुभवों के आधार पर जवाब दिया।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में सफलता के लिए ईमानदारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अटूट समर्पण अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को भविष्य में न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी भूमिका की कल्पना करने के लिए प्रोत्साहित किया। व्याख्यान का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसने इसे एक अकादमिक रूप से समृद्ध और प्रेरणादायी सत्र बना दिया।







