मध्य प्रदेश में चल रही स्वामित्व योजना को लेकर पटवारी और सरकार के बीच ठनी हुई है, सरकार इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को निःशुल्क रजिस्ट्री उपलब्ध करा रही है, लेकिन पटवारी इस काम में आनाकानी कर रहे हैं। इसे लेकर कलेक्टर पटवारियों को फटकार भी लगा रहे हैं उनको निलंबित भी किया जा रहा है बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी जा रही है लेकिन पटवारी अपनी जिद पर है। इस बीच सामने आये रिश्वतखोरी से जुड़े आंकड़ों ने पटवारियों की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने 17 सितम्बर को स्वामित्व योजना शुरू की थी जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद 50 लाख से अधिक निजी संपत्तियों की निःशुल्क रजिस्ट्री कराई जा रही है, सरकार द्वारा इसमें ग्रामीणों से किसी तरह की स्टाम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। अर्थात पूरी तरह से मुफ्त रजिस्ट्री कर ग्रामीणों को सौंपनी है, 17 अक्टूबर योजना की अंतिम तारीख निर्धारित की गई है, रजिस्ट्री की जिम्मेदारी पटवारी को दी गई है लेकिन वे इसका विरोध कर रहे हैं उन्होंने योजना में कई खामियां गिनाकर रजिस्ट्री करने से इंकार कर दिया।
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पटवारियों का कहना है यदि रजिस्ट्री में किसी तरह की कोई गड़बड़ी हो जाती है तो उनकी नौकरी चली जाएगी अधिकारी तो ट्रांसफर होकर चले जायेंगे लेकिन हम कहाँ जायेंगे कोई हमारी नहीं सुनेगा। पटवारी इस योजना में सीधे उनकी भूमिका को गलत मान रहे हैं लेकिन सरकार है कि स्पष्ट कह चुकी है रजिस्ट्री करनी होगी। इधर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल रजिस्ट्री की धीमी गति पर कलेक्टर्स को फटकार लगा चुके हैं इस बीच पटवारियों से जुड़े रिश्वतखोरी के आंकड़े सामने आने पर उनकी मंशा पर शंका गहराने लगी है।
इंदौर – उज्जैन संभाग के 16 जिलों में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़े गये
दरअसल मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी की घटनाओं पर नजर डालेंगे तो लोकायुक्त पुलिस द्वारा रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले शासकीय सेवकों में सबसे अधिक संख्या पटवारियों की ही होती है। प्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभाग में पिछले दो साल में हुई कार्रवाई के आंकड़े देखेंगे तो दोनों संभागों के 16 जिलों में लोकायुक्त पुलिस ने 32 पटवारियों को रिश्वत लेते पकड़ा है, इसमें सभी मामले जमीन सम्बन्धी हैं जैसे नामांकन, रजिस्ट्री, सीमांकन, बटांकन आदि, रिश्वत भी 1 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपए तक मांगी गई है।
पटवारियों के निजी कार्यालय, निजी स्टाफ!
ये आंकड़े सिर्फ दो संभागों के हैं, प्रदेश के अन्य संभागों में जिलों में हुई घूसखोरी कार्रवाई के आंकड़े जब सामने आयेंगे तो निश्चित है एक बड़ा आंकड़ा सामने आयेगा। लोकायुक्त कार्रवाई के दौरान कई जगह तो पटवारियों के निजी कार्यालय भी सामने आये, उनके द्वारा रिश्वत लेने के लिए प्राइवेट व्यक्तियों को रखने की भी बात सामने आई, इन आंकड़ों के बाहर आने के बाद लोग कह रहे हैं ये तो चोरी और सीना जोरी वाली बात हो गई। लोगों का कहना है कि पटवारियों को नौकरी जाने के भय से ज्यादा अपनी काली कमाई जाने का डर सता रहा है इसलिए वे जनहित की इस योजना से कन्नी काट रहे हैं। बहरहाल अब योजना समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष हिं 17 अक्टूबर अभी की स्थिति में लास्ट डेट हैं देखना होगा अंतिम स्थिति क्या बनती है।
