Hindi News

“साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए अभियान से जुड़ने का बड़ा अवसर..” जल गंगा संवर्धन अभियान की बात कर बोले सीएम डॉ. मोहन यादव “बिन पानी सब सून”

Written by:Gaurav Sharma
Published:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान में जनता से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने पानी के महत्व को समझाते हुए 30 जून तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने की बात कही।
“साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए अभियान से जुड़ने का बड़ा अवसर..” जल गंगा संवर्धन अभियान की बात कर बोले सीएम डॉ. मोहन यादव “बिन पानी सब सून”

पानी जीवन का आधार है। बिना पानी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जनता से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है। यह अभियान जनता के सहयोग से ही सफल हो सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कवि रहीम के एक प्रसिद्ध दोहे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में पानी का बहुत महत्व है। बिना पानी के संकल्प के कोई भी पूजा या अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। यह बात हम सभी को समझनी चाहिए। जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक पूरे प्रदेश में चलेगा। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। परिषद 25 मई को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करेगा। गंगा दशहरे के शुभ अवसर पर जल स्रोत पूजन और गंगा कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस यात्रा के पोस्टर का विमोचन भी किया है। यह एक महत्वपूर्ण कार्य है।

30 जून तक चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जल संचय के कई महत्वपूर्ण काम हो रहे हैं। हमारी सरकार भी जल संरक्षण को लेकर गंभीर है। इसी क्रम में गुड़ी पड़वा से लेकर 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। गंगा दशमी के दिन पूरे प्रदेश में एक साथ श्रमदान का कार्यक्रम होगा। सभी कुओं, बावड़ियों, नहरों और तालाबों पर लोग मिलकर साफ-सफाई और संरक्षण का काम करेंगे। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा अभियान है।

हम इस अभियान में जन अभियान परिषद, उसके उपाध्यक्ष मोहन नागर, सभी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और अलग-अलग संस्थाओं को जोड़ रहे हैं। हम आम जनता से भी आह्वान करते हैं कि वे भी इस जल गंगा संवर्धन अभियान से जुड़ें। जनता के जुड़ने से ही इस तरह के बड़े अभियान सही मायने में सार्थक होते हैं।

मुख्यमंत्री ने किया रहीम के दोहे का जिक्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में जल का महत्व आदिकाल से है। हमारे यहां कोई भी अनुष्ठान या पूजा बिना जल संकल्प के पूरी नहीं होती। रहीम दास जी ने भी कहा था, ‘रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून, पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।’ इसका सीधा सा अर्थ है कि पानी के बिना सब कुछ अधूरा है। पानी के बिना इस पूरी सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

हम आजकल बदलते पर्यावरण और मौसम को देख रहे हैं। ऐसे में पानी का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। हर जगह पानी बचाने की बात हो रही है। आइए हम सब मिलकर जल संरक्षण और जल चेतना के काम करें। इस अभियान में परिषद के सहयोगी नेटवर्क भी शामिल हैं। प्रस्फुटन समिति, नवांकुर सखी, सीएमसीएलडीपी के छात्र और परामर्शदाता, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, स्वैच्छिक संगठन, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगठन सब मिलकर जन-जागरण का काम करेंगे। यह सभी मिलकर लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभियान प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के लिए एक बड़ा अवसर है। यह जल संरक्षण अभियान से जुड़ने का मौका है। हम सभी से आह्वान करते हैं कि इस अभियान में भागीदार बनें। गंगा दशमी एक पवित्र त्योहार है। इस दिन हमारी प्रतिबद्धता सनातन संस्कृति के समय से मां गंगा से भी जुड़ती है। हम मां गंगा के निमित्त हैं। मध्य प्रदेश को 250 से ज्यादा नदियों का मायका कहा जाता है। हमें इस बात का गर्व है। आइए हम सब मिलकर इस जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाएं और पानी बचाएं।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews