देशभर में सुर्खियां में आया भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी ही। दरअसल विशेष कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपों को गंभीर मानते हुए गिरीबाला की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने के एक दिन बाद जमानत निरस्त की।
चार जजों ने सुनवाई से खुद को किया था अलग
गिरिबाला की जमानत याचिका की सुनवाई से चार जजों ने खुद को अलग कर लिया था जिसके बाद फिर मामला विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ। 24 जुलाई को विशेष अदालत में जमानत अर्जी पर लंबी सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने एक दिन बाद फैसला सुनाया।
गिरीबाला के वकील ने दी थी दलील
इस पूरे मामलें में गिरिबाला के वकील की तरफ से दलील दी गई कि गिरिबाला सिंह महिला हैं और उम्र अधिक है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, जेल में पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा है। उनकी लगभग 100 वर्षीय मां उनकी देखभाल पर निर्भर हैं। जांच में सहयोग किया है। वह नियमित वेतन और युद्ध वीरांगना पेंशन प्राप्त करती हैं, इसके साथ ही ट्विशा के साथ उनके अच्छे संबंध थे। वही गिरिबाला आर्थिक रूप से सक्षम है जिसकी वजह से दहेज मांगने का आरोप स्वाभाविक नहीं है।
सीबीआई ने किया विरोध
वहीं, CBI ने गिरिबाला की जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इस मामले में मृतका भी एक महिला थी। इसलिए लिंग के आधार पर राहत का कोई औचित्य नहीं बनताइसके साथ हो गिरिबाला के खराब स्वास्थ्य का भी हवाला दिया गया लेकिन CBI ने जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश कर स्वास्थ्य स्थिति सामान्य बताई। साथ ही कहा कि हाईकोर्ट पहले ही अग्रिम जमानत निरस्त कर चुका है और जांच के दौरान आरोपी ने वॉयस सैंपल देने से भी इनकार किया था।
गिरिबाला सिंह पर जांच को प्रभावित करने के आरोप
सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह पर जांच को प्रभावित करने के आरोप हैं। उन्होंने मामले से जुड़े CCTV तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क किया और CCTV फुटेज हासिल करने के लिए अपना निजी प्रतिनिधि भेजा। CBI को आशंका है कि जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को फिर से प्रभावित कर सकती हैं, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं या जांच में बाधा डाल सकती हैं।
गिरिबाला और समर्थ दोनों भोपाल सेंट्रल जेल में बंद
इन्हीं तमाम तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस मामलें को बेहद गंभीर माना है। वही अब 28 जुलाई को समर्थ और गिरिबाला की ज्यूडिशियल रिमांड खत्म हो रही है। 28 जुलाई को ज्यूडिशियल रिमांड मामलें में सुनवाई होगी। गिरिबाला और समर्थ दोनों भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है। इससे पहले गिरिबाला की निचली अदालत से 15 मई को जमानत मिली थी लेकिन हाईकोर्ट ने सीबीआई के इस केस को लेने के बाद 27 मई को हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कर दी थी। 20 जुलाई को गिरीबाला ने फिर जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन सुनवाई के बाद फिर जमानत याचिका खारिज हो गई।





