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“हर घर जल” पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, बोले- सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित रह गई योजना

Written by:Atul Saxena
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उमंग सिंघार ने कहा भाजपा सरकार की प्राथमिकता जनता की प्यास बुझाना नहीं, अपनी छवि चमकाना बन गई है। मध्यप्रदेश की जनता अब आंकड़ों का जादू नहीं, नलों में पानी और जवाबदेही चाहती है।
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“हर घर जल” पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, बोले- सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित रह गई योजना

Leader of the Opposition Umang Singhar

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “नल जल योजना” जिसके माध्यम से हर घर जल पहुंचाने का दावा सरकार कर रही है जमीन पर उतनी कारगार नहीं दिखाई देती जितनी सरकारी फाइलों में और नेताओं के भाषणों में दिखाई देती है, प्रदेश के अधिकांश जिलों के हालत बताते हैं कि सरकारी मुलाजिम किस तरह सरकार की मंशा को चूना लगा रहे हैं हालाँकि इसके लिए कांग्रेस राज्य सरकार को ही दोष दे रही है।

गर्मियों में प्रदेश के कई इलाके पेयजल संकट से जूझते हैं इन्हीं में से एक है ग्वालियर अंचल जहाँ तापमान जैसे जैसे ऊपर जाता है वैसे वैसे भूजल स्तर गिरता जाता है, शहरी क्षेत्रों में तो  पेयजल की व्यवस्था हो जाती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ख़राब हो जाते हैं, दावे हैं कि नल जल योजना के माध्यम से हर घर जल पहुंचाने का काम अधिकांश गाँवों में हो गया है लेकिन ये कितना कारगर है ये जमीनी हकीकत बताती है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया X पर लिखा- भाजपा सरकार के “हर घर जल” के दावों की पोल ग्वालियर में खुलकर सामने आ गई है। 276 में से 63 नल-जल योजनाएँ बंद हैं, 63 गाँव जलसंकट से त्रस्त हैं और ग्रामीण बूँद-बूँद पानी के लिए भटक रहे हैं। हालत यह है कि सरकार के पास खराब मोटरें बदलने तक के संसाधन नहीं हैं।

बड़ा सवाल, योजना का करोड़ों रुपया कहा गया ?

सवाल है कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अगर गाँवों तक पानी नहीं पहुँचा, तो आखिर यह पैसा गया कहाँ? क्या “हर घर जल” सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित योजना बनकर रह गई है? एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे करते हैं, दूसरी तरफ प्रदेश के गाँव प्यास से जूझ रहे हैं। भाजपा सरकार की प्राथमिकता जनता की प्यास बुझाना नहीं, अपनी छवि चमकाना बन गई है। मध्यप्रदेश की जनता अब आंकड़ों का जादू नहीं, नलों में पानी और जवाबदेही चाहती है।

ग्वालियर जिले में ऐसे हैं हालात 

दर असल मीडिया रिपोर्ट्स भी कहती हैं जिले के कई गाँव ऐसे हैं जहाँ हालात विषम है, ग्रामीण दूर से पानी लाने के लिए मजबूर हैं, नल जल योजना के पाइप तो गाँव में बिछे हैं लेकिन उनमें पानी नहीं आता। ग्वालियर जिले के घाटीगाँव, भितरवार क्षेत्र में करीब 15 गाँव ऐसे हैं जहाँ नल जल योजना है लेकिन बंद पड़ी है यहाँ पानी माफिया 200 से 500 रुपये लेकर पानी पहुंचा रहे हैं। सोंजना गाँव में एक निजी ट्यूब वेल से पानी सप्लाई की जाती हैं पूरे गाँव में बिजली के खम्बों पर पानी के पाइप लटके हुए हैं जिसके जरिये पानी माफिया लोगों के घरों तक पानी पहुंचाता ही और पैसे लेता है। यही हाल दौरार गाँव का है, बासोड़ी गाँव में एक कुएं में 33 पाइप लटके हैं जिसके जरिये लोगों के घरों तक पानी पहुँचता है।

सरकार को लेना होगा एक्शन 

बहरहाल खेत और किसान के लिए बड़ी बड़ी योजनायें चलाने वाली सरकार को इन विषम हालातों की जानकारी लेकर अपने दावों को हकीकत में बदलना चाहिए, और यदि उनसे ये हालात छिपाए जा रहे हैं तो उन सरकारी मुलाजिमों पर एक्शन लेना चाहिए जो जानबूझकर मुख्यमंत्री और उनकी सरकार को अँधेरे में रखते हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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