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टाइगर स्टेट में बाघों की मौत पर उमंग सिंघार ने जताई चिंता, मुख्यमंत्री से जवाबदेही तय करने और ठोस एक्शन प्लान बनाने की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बाघों के सुरक्षित आवास, पर्याप्त वन अमला और प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सही कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बाघ सिर्फ वन्यजीव नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की पहचान हैं और उनकी सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।
टाइगर स्टेट में बाघों की मौत पर उमंग सिंघार ने जताई चिंता, मुख्यमंत्री से जवाबदेही तय करने और ठोस एक्शन प्लान बनाने की मांग

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले दो महीनों में 12 बाघों की मौत की खबरें बेहद चिंताजनक हैं और यह वन प्रबंधन तथा संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बाघ सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि हमारे जंगलों की शान और मध्यप्रदेश की पहचान हैं। देश-दुनिया में मध्यप्रदेश को “टाइगर स्टेट” के रूप में जाना जाता है, ऐसे में लगातार हो रही बाघों की मौत चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से बाघों के बीच बढ़ते टेरिटोरियल फाइट और कमजोर संरक्षण व्यवस्था सरकार की वन प्रबंधन नीति की खामियों को उजागर कर रही है।

टाइगर स्टेट में बाघों की मौत ने बढ़ाई चिंता

मध्यप्रदेश में हाल के महीनों में अलग-अलग टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्रों से बाघों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इनमें कई मामलों में बाघों के बीच आपसी संघर्ष, कुछ मामलों में प्राकृतिक कारण और कुछ मामलों में अन्य परिस्थितियों को कारण बताया गया है। इस साल जनवरी-फरवरी में कम से कम 10-11 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्रोतों में इसे 12 तक बताया जा रहा है। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच बांधवगढ़ में कुल 8 बाघों की मौत हुई। इनमें से 4 मौतें इलेक्ट्रोक्यूशन से हुई जबकि बाकी 4 प्राकृतिक कारणों जैसे आपसी संघर्ष, बीमारी या अन्य से। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बांधवगढ़ में मौतों पर गंभीर संज्ञान लिया है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर कोर्ट बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर से पिछले ढाई महीने में हुई 8 बाघों की मौत पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से की ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग

इस मुद्दे पर उमंग सिंघार ने चिंता जताई है और सरकार के वन प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे सरकार की विफलता करार देते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और ठोस कार्ययोजना की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाघों के बीच लगातार बढ़ते आपसी संघर्ष और संरक्षण व्यवस्था की कमजोर स्थिति सरकार के वन प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बाघों की संख्या बढ़ना निश्चित रूप से गर्व की बात है लेकिन उन्हें सुरक्षित आवास, पर्याप्त वन अमला और प्रभावी संरक्षण उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है तो यह जंगलों के असंतुलित प्रबंधन और प्रशासनिक कमी को दर्शाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस विषय पर संज्ञान लेकर और जवाबदेही तय करते हुए ठोस व प्रभावी कार्ययोजना सामने रखें, ताकि मध्यप्रदेश की पहचान और राष्ट्रीय पशु बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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