उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में पिछले एक साल से अधिक समय में 17 दिव्यांग बच्चों की मौत का मामला गंभीर विवाद का विषय बन गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इसपर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए थे और इसपर अदालत में रिपोर्ट पेश की गई है। अदालत ने मामले पर राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।
इस मामले पर कांग्रेस ने भी सवाल किए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन में ऐसा होना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया और तत्काल जवाबदेही एवं सुधार की मांग की है।
उज्जैन सेवाधाम आश्रम मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में पिछले एक साल से अधिक समय में 17 दिव्यांग बच्चों की मौत का मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था। इस मामले पर अब अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा है।
ये है मामला
बता दें कि इंदौर के श्री युगपुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और लापरवाही के आरोपों के बाद प्रशासन ने वहां की मान्यता रद्द कर दी थी और 86 दिव्यांग और अनाथ बच्चों को बेहतर देखभाल के उद्देश्य से उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में स्थानांतरित किया गया था। लेकिन स्थानांतरण के बाद स्थिति और खराब हो गई। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक इनमें से 17 बच्चों की मौत हो चुकी है। अधिकांश मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ, गंभीर एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याएं बताई गई हैं।
उमंग सिंघार ने की जवाबदेही तय करने की मांग
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन में इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ‘सेवाधाम आश्रम में एक साल के भीतर 17 बच्चों की मौत और 1000 से अधिक दिव्यांग-परित्यक्त लोगों के रहने के बावजूद मेडिकल सुविधा का अभाव बेहद गंभीर मामला है।’ उन्होंने कहा कि 1056 लोगों वाले इस आश्रम में न स्थायी डॉक्टर हैं और न ही इमरजेंसी मेडिकल व्यवस्था। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। उमंग सिंघार ने सरकार से इस मामले में तत्काल जवाबदेही तय कर व्यवस्था सुधारने की मांग की है।






