भोपाल में ‘जोहार’ कहने पर आदिवासी छात्रों से अभद्रता का आरोप, उमंग सिंघार ने की पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग

कांग्रेस नेता ने भोपाल में आदिवासी छात्रों के साथ अभद्रता के मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में जवाबदेही तय करने और दोषी पुलिसकर्मियों के कार्रवाई करने की मांग की है।
Umang Singhar

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मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में आदिवासी छात्रों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज किए जाने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले आदिवासी छात्रों के साथ ‘जोहार’ कहने पर अभद्र व्यवहार किया जाना गंभीर और निंदनीय है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासी संस्कृति और अस्मिता का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल नागरिकों को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए होना चाहिए।

क्या है मामला

भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान अभद्रता का मामला सामने आया है। गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के विद्यार्थी एसआईआर और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने आदिवासी युवक के ‘जोहार’ कहने पर अभद्र टिप्पणी की और गाली-गलौज की। ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

उमंग सिंघार ने की एफआईआर की मांग 

इस मामले को उमंग सिंघार ने गंभीर और निंदनीय बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल नागरिकों को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए होना चाहिए। कानून के रखवालों से संविधान और कानून का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और अस्मिता का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपने संघर्ष को संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आदिवासी अस्मिता के सम्मान से जोड़ते हुए ‘जय जोहार, जय आदिवासी और जय संविधान’ का नारा दिया।

‘जोहार’ का अर्थ और आदिवासी संस्कृति में महत्व

‘जोहार’ आदिवासी समुदायों में प्रचलित पारंपरिक अभिवादन है। इसका इस्तेमाल एक-दूसरे का अभिवादन करने, सम्मान जताने और आत्मीयता व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह शब्द आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ा है। आदिवासी समुदायों में ‘जोहार’ कहना सिर्फ औपचारिक अभिवादन नहीं, बल्कि सामने वाले व्यक्ति के प्रति आदर और अपनत्व व्यक्त करने का तरीका भी है। आमतौर पर इसे सम्मान, सद्भाव और भाईचारे की भावना से जोड़ा जाता है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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