छिंदवाड़ा जिले के नजरपुर गांव से ऐसी खबर आई है जिसने प्रशासनिक कार्यशैली और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदिवासी बहुल वार्डों में भीषण गर्मी के बीच लोगों ने उपसरपंच पर पानी की आपूर्ति जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने इस बाबत संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना है। उन्होंने कहा कि “भीषण गर्मी में जब हर घर को पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, तब आदिवासी बहुल वार्डों में पानी की आपूर्ति रोकना सिर्फ भेदभाव नहीं, बल्कि इंसानियत पर चोट है।”
आदिवासी गांव में जानबूझकर जल आपूर्ति रोकने का आरोप
छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव जनपद के नजरपुर गांव के लोगों का कहना है कि उपसरपंच ने उनके यहां पानी की सप्लाई जानबूझकर रोकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आदिवासी बहुल इलाके के ग्रामीणों का कहना है कि बाकी वॉर्डों में पानी की सप्लाई होती है लेकिन उनके यहां पानी नहीं आता। इस गर्मी के मौसम में पानी न आने के कारण वे कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और इसे लेकर उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन भी दिया है।
उमंग सिंघार ने की सीएम से जांच और कार्रवाई की मांग
इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक आईना है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में जब हर घर को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब आदिवासी बहुल वार्डों में जानबूझकर पानी की आपूर्ति रोकना सिर्फ भेदभाव नहीं, बल्कि इंसानियत पर चोट है। कांग्रेस नेता ने कहा कि और भी पीड़ादायक बात यह है कि जिम्मेदारी के पद पर बैठे उपसरपंच ने आदिवासी समाज के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की। यह न सिर्फ असंवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि हमारे संविधान और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ भी है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समाज इस देश की जड़ों में बसता है और उनके साथ ऐसा व्यवहार किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद मुख्यमंत्री से आग्रह करती है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए, निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी भी समुदाय के साथ ऐसा अन्याय दोबारा न हो।






