दुनियाभर में आज “विश्व पृथ्वी दिवस” मनाया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार क्षरण के बीच यह दिन पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक चेतना का प्रतीक बन गया है। इस अवसर पर विभिन्न देशों में जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान और स्वच्छता अभियानों का आयोजन किया जा रहा है।
सीएम डॉ मोहन यादव ने आज के दिए प्रदेशवासियों से प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने, संसाधनों का संयमित उपयोग करने और अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि “जिस धरती पर जन्म मिला है, उसका संरक्षण हर नागरिक का परम धर्म है। आने वाली पीढ़ियों के लिए जल, जंगल और जमीन को हर हाल में सुरक्षित व समृद्ध रखना होगा। यही मानवता की सच्ची सेवा है।”
विश्व पृथ्वी दिवस का इतिहास
पहले विश्व पृथ्वी दिवस का आयोजन 22 अप्रैल 1970 को अमेरिका में हुआ था। इसकी कल्पना अमेरिका के विस्कॉन्सिन से सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी। दरअसल 1969 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में हुए भयानक तेल रिसाव ने गेलॉर्ड नेल्सन को झकझोर दिया था। उन्होंने महसूस किया कि पर्यावरण को राष्ट्रीय एजेंडे में लाने के लिए एक बड़े जन-आंदोलन की आवश्यकता है जिसके बाद ये दिन मनाया गया। पहली बार इसमें करीब 2 करोड़ लोगों ने भाग लिया। इस आंदोलन के प्रभाव से अमेरिका में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई कानून बने और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) की स्थापना हुई। वर्ष 1990 से यह अभियान वैश्विक स्तर पर फैल गया और आज 190 से अधिक देशों में इसे मनाया जाता है।
इस दिन का उद्देश्य और महत्व
पृथ्वी दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और पृथ्वी के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। लोगों में प्रदूषण, वनों की कटाई, और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूकता आए, यही इस दिन का मकसद है। इसके तहत जलवायु परिवर्तन से निपटने, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, जैव विविधता के संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया जाता है। यह वैश्विक स्तर पर सरकारों को पर्यावरण समर्थक कानून बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त मंच है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में पृथ्वी दिवस का महत्व और बढ़ गया है। लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान, ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र स्तर में वृद्धि, वायु और जल प्रदूषण तथा वन्य जीवों की घटती संख्या गंभीर चिंता का विषय हैं। प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। ये दिन हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण की रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति के छोटे कदम भी बड़े परिवर्तन का हिस्सा बन सकते हैं।






