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MP गेहूं खरीदी: कमलनाथ का आरोप “सरकार की नीतियों से हार रहा है किसान”, 8 लाख किसानों के बाहर होने पर उठाए सवाल

Written by:Shruty Kushwaha
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उन्होंने कहा कि देरी, जटिल प्रक्रिया और सख्त शर्तों के कारण किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दाम पर बेचने को विवश हो रहे हैं। पूर्व सीएम ने खरीदी की तारीखों में लगातार बदलाव, बड़े किसानों को दायरे से बाहर रखने और बार-बार वेरिफिकेशन जैसी प्रक्रियाओं को किसानों के लिए नुकसानदायक बताया है।
MP गेहूं खरीदी: कमलनाथ का आरोप “सरकार की नीतियों से हार रहा है किसान”, 8 लाख किसानों के बाहर होने पर उठाए सवाल

Kamal Nath

कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर एक बार फिर सरकार को घेरा है। उन्होंने बीजेपी पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश का किसान अब सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं से ही नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों से भी जूझ रहा है।

पूर्व सीएम ने कहा कि जिन व्यवस्थाओं को किसानों के सहारे खड़ा होना चाहिए था, वही अब उन्हें बाजार के भरोसे छोड़ती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीदी प्रक्रिया को इस तरह जटिल बना दिया गया है कि किसान मजबूरी में अपनी उपज खुले बाजार में कम दाम पर बेचने को विवश हो रहा है।

कमलनाथ ने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा

कमलनाथ ने सवाल किया है कि यदि सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है तो खरीदी प्रक्रिया समय पर शुरू क्यों नहीं हुई और तारीखें बार-बार क्यों बढ़ाई गईं। उन्होंने कहा है कि देरी का सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा, क्योंकि लंबे समय तक फसल को सुरक्षित रखना हर किसान के लिए संभव नहीं होता। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि दो हेक्टेयर से अधिक जमीन वाले किसानों को खरीदी प्रक्रिया से बाहर करना एक सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है। उन्होंने पूछा कि क्या बड़े किसान किसान नहीं हैं, या फिर सरकार जानबूझकर खरीदी का दायरा सीमित कर रही है ताकि आंकड़ों में स्थिति सामान्य दिखाई दे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बार-बार वेरिफिकेशन और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया ने हालात और खराब कर दिए। जिन किसानों को समय पर समर्थन मूल्य और भुगतान मिलना चाहिए था, वे कागजी प्रक्रियाओं में उलझकर रह गए। इसके चलते बड़ी मात्रा में गेहूं खुले बाजार में कम कीमत पर बिक गया, जो किसानों के साथ आर्थिक अन्याय है।

आठ लाख किसानों को बाहर किए जाने पर सरकार से किए सवाल

मंडी स्तर पर भी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए कमलनाथ ने कहा कि तौल में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों पर प्रति क्विंटल 2 से 5 किलो तक अतिरिक्त तौल का दबाव बनाया जा रहा है जो उनको सीधा नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सब प्रशासन की जानकारी के बिना संभव है। उन्होंने कहा कि किसानों का भरोसा सरकार से उठता जा रहा है। कांग्रेस नेता कहा कि जब नीति बनाने वालों और उससे प्रभावित लोगों के बीच विश्वास खत्म हो जाए तो यह पूरे सिस्टम की विफलता का संकेत होता है। इसी के साथ उन्होंने सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर क्यों 8 लाख से अधिक किसान खरीदी के दायरे से बाहर हो गए और उन्हें समर्थन मूल्य का लाभ क्यों नहीं मिल पाया।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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