पटना: बिहार सरकार ने शुक्रवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में लोक-कल्याण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है। कुल 17 एजेंडों को मंजूरी दी गई, जिनमें प्रवासी मजदूरों के हित में लिया गया फैसला सबसे बड़ा और ऐतिहासिक माना जा रहा है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य का विकास और आम जनता की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस बैठक में लिए गए निर्णयों का सीधा असर उन लाखों परिवारों पर पड़ेगा जो रोजी-रोटी के लिए राज्य से बाहर पलायन करते हैं।
प्रवासी मजदूरों के लिए ऐतिहासिक फैसला
कैबिनेट ने प्रवासी मजदूरों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर एक बेहद संवेदनशील निर्णय लिया है। अब अगर किसी भी प्रवासी बिहारी मजदूर की मृत्यु राज्य के बाहर या देश के बाहर हो जाती है, तो उनके पार्थिव शरीर को सरकारी खर्च पर उनके पैतृक गांव तक पहुंचाया जाएगा। यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें ऐसी दुखद घड़ी में आर्थिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी तय किया है कि यदि कोई मजदूर बाहर किसी दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसके इलाज का पूरा खर्च भी अब बिहार सरकार उठाएगी। यह कदम मजदूरों और उनके परिवारों को एक बड़ा सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
सड़क हादसों के पीड़ितों को अब दोगुनी मदद
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजे की राशि को दोगुना कर दिया है। इस बढ़ोतरी से पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल सकेगी और वे इस मुश्किल समय का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगे। यह फैसला सड़क सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता को भी दर्शाता है।
प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता
सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने और नौकरशाही पर लगाम कसने के उद्देश्य से भी एक बड़ा कदम उठाया है। अब जिलों में होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों में सांसद और विधायकों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले सकेंगे। इस फैसले से विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में जनप्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ेगी और जनता की आवाज को अधिक प्रभावी ढंग से सुना जा सकेगा।
इसके साथ ही, शहरी विकास को गति देने के लिए नगर परिषद में स्थायी सशक्त समिति को लेकर भी एक निर्णायक फैसला लिया गया है, जिससे शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।





