नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रशांत किशोर की राजनीतिक पार्टी ‘जन सुराज’ को कड़ी फटकार लगाते हुए उसकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। पार्टी ने बिहार में हुए पिछले विधानसभा चुनाव को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने पार्टी के जनाधार पर ही सवाल खड़ा कर दिया और इसे लोकप्रियता हासिल करने का एक तरीका बताया।
‘पहले बताइए, कितने वोट मिले आपको?’
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने जन सुराज पार्टी के वकील से तीखे सवाल किए। अदालत ने याचिका की योग्यता पर संदेह जताते हुए कहा कि एक ही याचिका में पूरे राज्य के चुनाव को कैसे रद्द किया जा सकता है। जब पार्टी के वकील ने दलील दी कि यह एक गंभीर मुद्दा है और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सरकारी योजना का दुरुपयोग हुआ है, तो सीजेआई ने एक सीधा और चुभने वाला सवाल पूछा।
“आपकी राजनीतिक पार्टी को कितने वोट मिले? लोग आपको नकार देते हैं और फिर आप लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं।”- मुख्य न्यायाधीश
अदालत की इस तल्ख टिप्पणी के बाद जन सुराज पार्टी की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस लेने का फैसला किया, जिसे कोर्ट ने तुरंत स्वीकार कर लिया।
क्या थी जन सुराज पार्टी की दलील?
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया। याचिका में विशेष रूप से ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का जिक्र था।
इस योजना के तहत, सरकार ने प्रत्येक परिवार की एक महिला (जिसके पति इनकम टैक्स नहीं देते) को स्वरोजगार के लिए 10,000 रुपये सीधे बैंक खाते में देने का फैसला किया था। साथ ही, बाद में मूल्यांकन के आधार पर 2 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता का भी वादा किया गया था। पार्टी का आरोप था कि यह कदम आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और इससे निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
चुनाव में बेहद खराब रहा था प्रदर्शन
दिलचस्प बात यह है कि जन सुराज पार्टी ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में 243 में से 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। उसे कुल मतदान का महज 3.4 प्रतिशत (लगभग 16.77 लाख) वोट ही मिल पाया था। पार्टी की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। केवल एक सीट पर उसका उम्मीदवार दूसरे स्थान पर और 115 सीटों पर तीसरे स्थान पर रहा था। अदालत की टिप्पणी को पार्टी के इसी चुनावी प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।





