बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान जारी है। 6 सितंबर को तेजस्वी यादव के आवास पोलो रोड पर महागठबंधन की कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक हुई थी। बैठक के बाद मुकेश सहनी ने 15 सितंबर से पहले सीट शेयरिंग फाइनल करने की संभावना जताई थी। लेकिन आज 15 सितंबर बीतने के बाद भी कोई अपडेट नहीं आया। तेजस्वी यादव 16 सितंबर से बिहार अधिकार यात्रा पर निकल रहे हैं, जो 20 सितंबर को खत्म होगी। ऐसे में चुनावी अभियान से पहले सीट शेयरिंग का ऐलान मुश्किल नजर आता है।
महागठबंधन के भीतर घटक दलों की मांगें बढ़ी
महागठबंधन में सबसे प्रभावशाली पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) है। पिछली बार राजद ने 144 सीटों में 75 पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस, भाकपा माले और अन्य वाम दलों की हिस्सेदारी कम रही थी। इस बार कांग्रेस अपनी सीटें केवल संख्या के हिसाब से नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता के आधार पर मांग रही है। सीमांचल और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अधिक हिस्सेदारी चाहती है। राजद पहले मुस्लिम बहुल इलाकों को खुद ब्लॉक कर लेता था, लेकिन इस बार कांग्रेस पूरी तरह सतर्क है और अपनी रणनीति को मजबूत कर रही है।
तेजस्वी यादव की अधिकार यात्रा और राजनीतिक दबाव
तेजस्वी यादव की अधिकार यात्रा 16 से 20 सितंबर तक होगी। यात्रा से पहले सीट शेयरिंग का ऐलान न होने से महागठबंधन में राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। घटक दल संतुष्ट नहीं होंगे तो राजद के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल होगा। एनडीए भी इस स्थिति का फायदा उठा सकता है। महागठबंधन की रणनीति इस बार केवल सीटें बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि जीतने की क्षमता वाले क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाने पर केंद्रित है।
कांग्रेस की मांगें और राजद की चुनौती
कांग्रेस सीमांचल और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अधिक हिस्सेदारी मांग रही है। यह पिछली गलती को दोहराना नहीं चाहती। राजद को अब घटक दलों को संतुष्ट करना चुनौतीपूर्ण लग रहा है। मुकेश सहनी की 15 सितंबर की डेडलाइन फेल हो गई है। अगर सीट शेयरिंग का ऐलान जल्द नहीं हुआ तो चुनावी अभियान में समय कम रहेगा। आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर कूटनीति और रणनीति का खेल तेज होने की संभावना है। इस बार गठबंधन के लिए संतुलन बनाए रखना बड़ी परीक्षा साबित होगा।





