पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। छह उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से एक सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जिसे जीतने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (MGB) अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसी रणनीति के तहत विधायकों को एकजुट रखने के लिए बैठकों और भोज का दौर शुरू हो गया है।
गुरुवार शाम को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आवास पर एनडीए के सभी विधायकों को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया। यह पहली बार है जब सम्राट चौधरी ने इतने बड़े स्तर पर विधायकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विधायकों को एकजुट करना और उन्हें मतदान प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराना है, ताकि कोई गलती न हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सारी कवायद पांचवीं सीट पर हर हाल में जीत सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।
तीन चरणों में एनडीए की बैठक और भोज
एनडीए ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए तीन दिवसीय रणनीति बनाई है। इसकी शुरुआत गुरुवार को सम्राट चौधरी के आवास पर भोज से हो रही है। इसके बाद 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष और राज्यसभा उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर भोज का आयोजन होगा। वहीं, 15 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी के आवास पर विधायकों की अंतिम बैठक बुलाई गई है। इन बैठकों के जरिए एनडीए अपने खेमे में किसी भी तरह की सेंधमारी की आशंका को खत्म करना चाहता है।
महागठबंधन ने भी बढ़ाया दबाव
दूसरी ओर, महागठबंधन भी पांचवीं सीट पर अपनी जीत का दावा कर रहा है। कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सहयोगी दलों के साथ बैठक की थी। इसके बाद AIMIM के बिहार प्रमुख अख्तरूल ईमान ने तेजस्वी से मुलाकात कर अपने पांच विधायकों के समर्थन का संकेत दिया।
“हमलोगों के बीच पॉजिटिव बात हुई है। लेकिन, अंतिम फैसला हमारे मुखिया असदुद्दीन ओवैसी लेंगे।”- अख्तरूल ईमान, AIMIM बिहार प्रमुख
अख्तरूल ईमान ने यह भी बताया कि 15 मार्च को उनके आवास पर इफ्तार पार्टी है, जिसमें तेजस्वी यादव भी शामिल होंगे। इन मुलाकातों के बाद राजद नेताओं का दावा है कि उनके पास जीत के लिए जरूरी बहुमत है। वहीं, आईआईपी पार्टी के प्रमुख इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने दावा किया कि एनडीए के कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं और महागठबंधन के पास 41 नहीं बल्कि 45 विधायकों का समर्थन है।
क्या है सीटों का गणित?
विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा और जदयू के खाते में दो-दो सीटें जाना तय माना जा रहा है। असली मुकाबला पांचवीं सीट के लिए है, जहां एनडीए और महागठबंधन दोनों को अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। एनडीए को यह सीट जीतने के लिए तीन और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, जबकि महागठबंधन को छह और विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
राज्यसभा उम्मीदवार:
- जदयू: नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर
- भाजपा: नितिन नवीन, शिवेश राम
- रालोमो: उपेंद्र कुशवाहा
- राजद: अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह)
दोनों गठबंधनों के नेता अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा और बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा है कि एनडीए सभी पांचों सीटें जीत रहा है और विपक्ष के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। अब देखना यह होगा कि इस शह-मात के खेल में बाजी किसके हाथ लगती है।






