नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच, भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध को दरकिनार करते हुए आयोग ने 152 विधानसभा क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारियों (RO) को पदोन्नत कर दिया है।
मंगलवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, इन अधिकारियों को अब उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM), समकक्ष या उससे उच्चतर रैंक पर नियुक्त किया गया है, जैसा कि देश के अन्य हिस्सों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान होता है। इस कदम के साथ ही अब पश्चिम बंगाल के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में रिटर्निंग अधिकारी एसडीएम या उससे ऊंचे पद के होंगे।
16 मार्च को हो सकता है चुनावी तारीखों का ऐलान
चुनाव आयोग के इस फैसले को राज्य में चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग 16 मार्च को पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि यह ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाली ‘परिवर्तन यात्रा’ की समापन रैली के ठीक दो दिन बाद हो सकता है।
बंगाल के अलावा, चुनाव आयोग उसी दिन असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए भी चुनावी कार्यक्रम जारी कर सकता है।
दो चरणों में मतदान कराने पर जोर
हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में ECI की एक पूर्ण पीठ ने राज्य का दौरा किया था। इस दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा, माकपा और कांग्रेस सहित अधिकांश राजनीतिक दलों ने चुनाव एक या अधिकतम दो चरणों में कराने की मांग की थी।
“पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव कराने से चुनाव से जुड़ी हिंसा को रोकने में मदद मिलेगी, क्योंकि बदमाशों को एक जगह से दूसरी जगह जाकर गड़बड़ी करने का समय नहीं मिलेगा। आखिरी फैसला लेने से पहले इस फैक्टर पर भी विचार किया जाएगा।”- एक राष्ट्रीय पोल पैनल अधिकारी
सूत्रों का मानना है कि चुनाव आयोग राज्य में दो चरणों में मतदान करा सकता है। पहला चरण अप्रैल के दूसरे या तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है। आयोग का मानना है कि कई चरणों में चुनाव कराने से सुरक्षा बलों की तैनाती बेहतर तरीके से की जा सकती है और हिंसा की आशंका को कम किया जा सकता है।






