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सिवनी हवाला कांड: डीएसपी पकंज मिश्रा, आरक्षक सहित तीन आरोपियों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, FIR रद्द करने के आदेश

कोर्ट ने कहा इसमें साजिश के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। इसलिए याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
MP High Court

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पिछले साल अक्टूबर में हुआ सिवनी हवाला कांड एक बार फिर चर्चा में है, मामले की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट ने इसमें एक बड़ा फैसला दिया है, अदालत ने मामले में आरोपी बनाये गए डीएसपी पकंज मिश्रा,आरक्षक प्रमोद सोनी और व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी को बड़ी राहत देते हुए एफआईआर रद्द करने के आदेश दिए हैं, हालांकि इसी केस में आरक्षक नीरज राजपूत की भी याचिका दायर थी, जिसे कि कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

आपको याद दिला दें 8 अक्टूबर 2025 का यह हवाला लूटकांड हुआ था, जब रात को डीएसपी पूजा पाण्डेय के नेतृत्व में सिवनी पुलिस की टीम ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहनलाल परमार की कार से 2.96 करोड़ रुपये नकदी पकड़ी थी। आरोप है कि पुलिस टीम ने पूरी रकम जब्त की, लेकिन रिकॉर्ड में सिर्फ 1.45 करोड़ रुपये की जब्ती दिखाई गई। मामला सामने आने पर लखनवाड़ा थाना में एसडीओपी पूजा पाण्डेय, डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया था।

डीएसपी मिश्रा, कांस्टेबल सोनी, व्यापारी को राहत 

बुधवार को हाई कोर्ट में डीएसपी पंकज मिश्रा, कांस्टेबल प्रमोद सोनी और जबलपुर के व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त, प्रकाश उपाध्याय और अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों को राहत दे दी।

कोर्ट बोली आरोप केवल अनुमान, शक पर आधारित 

सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ताओं के बीच पहले से साजिश, आपसी समझौता या संयुक्त कार्रवाई हुई थी। अदालत ने माना कि आरोप केवल अनुमान और शक पर आधारित हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता।

चार्जशीट, आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के आदेश 

कोर्ट ने कहा इसमें साजिश के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। इसलिए याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अदालत ने ये भी कहा कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के आवश्यक तत्व इन याचिकाकर्ताओं पर लागू नहीं होते। इसलिए चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है।

कांस्टेबल नीरज राजपूत की याचिका खारिज

सुनवाई के दौरान अदालत ने कांस्टेबल नीरज राजपूत की याचिका को सुना और फिर इसलिए खारिज कर दिया कि जिस टीम ने कार रोकी और रकम पकड़ी, उसमें उसकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। क्योंकि हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कॉल रिकॉर्ड या संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को आपराधिक मुकदमे में नहीं घसीटा जा सकता इसलिए अब गंभीर मामलों में भी जांच एजेंसियों को ठोस साक्ष्य पेश करने होंगे।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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