Hindi News

सिंगरौली में अस्पताल गेट पर डिलीवरी, नवजात की मौत: उमंग सिंघार ने की MP के स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
Last Updated:
चितरंगी में सामने आई इस दर्दनाक घटना ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। समय पर डॉक्टर और नर्स उपलब्ध न होने के कारण एक महिला को अस्पताल गेट पर ही प्रसव कराना पड़ा, जिसमें नवजात की जान चली गई। घटना के बाद उठे सवालों ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही और संवेदनशीलता पर बहस छेड़ दी है।
सिंगरौली में अस्पताल गेट पर डिलीवरी, नवजात की मौत: उमंग सिंघार ने की MP के स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग

Umang Singhar

उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला है। सिंगरौली के चितरंगी में एक बैगा आदिवासी महिला की अस्पताल गेट पर डिलीवरी और नवजात की मौत की घटना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्या आदिवासी समाज की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह सरकार की घोर विफलता और संवेदनहीनता का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रसूता को समय पर इलाज नहीं मिल सका, क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र में न डॉक्टर मौजूद था और न ही नर्स। गंभीर हालत में महिला अस्पताल परिसर में तड़पती रही और फिर गेट पर ही डिलीवरी करानी पड़ी। इस घटना को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे के मांग की है।

क्या है मामला 

जानकारी के अनुसार, सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में एक बैगा आदिवासी महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। लेकिन आरोप है कि वहां न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही नर्स उपलब्ध थी। महिला गंभीर हालत में अस्पताल परिसर में तड़पती रही, लेकिन उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। स्थिति इतनी खराब हो गई कि महिला को अस्पताल के गेट पर ही प्रसव करना पड़ा। इस दौरान नवजात शिशु ने जन्म के तुरंत बाद दम तोड़ दिया। घटना के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने संवेदनहीनता की हदें पार कर दी..परिजनों से ही बाल्टी में पानी मंगवाकर अस्पताल गेट पर फैले खून को साफ कराया गया।

उमंग सिंघार ने की स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग 

इस घटना पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह हृदयविदारक घटना प्रदेश में आदिवासी समाज की बदहाल स्थिति की कड़वी सच्चाई उजागर करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि प्रसूता महिलाओं को अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ना पड़े।

कांग्रे नेता ने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि “निर्ममता” है। उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई है और यह घटना सरकार की घोर विफलता और संवेदनहीनता का प्रमाण है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि यदि वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं, तो नैतिक आधार पर उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
Follow Us :GoogleNews