बिहार के उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग के अधिकारियों को खुलेआम धमकी देने वाले लोगों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में विधि-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था से कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने घोषणा की है कि काम पर लौटे ईमानदार अधिकारियों को धमकाना न सिर्फ कायरता है, बल्कि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य भी है। ऐसे तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस सख्ती के बाद अब तक 24 अधिकारी अपनी हड़ताल छोड़कर काम पर लौट चुके हैं, जो सरकार के कड़े रुख का सीधा परिणाम है।
उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “सरकार यह साफ कर देना चाहती है कि जो लोग डर और दबाव के जरिए राजस्व व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए बिहार में कोई जगह नहीं है।” उन्होंने दृढ़ता से कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जेल भेजना सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जो अधिकारी सरकार के साथ आए हैं, उनको सुरक्षा और सम्मान देना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि राजस्व विभाग का काम राज्य के विकास और आम जनता के हित से जुड़ा है, और इसे किसी भी हाल में बाधित नहीं होने दिया जाएगा। विजय सिन्हा ने ऐसे नेताओं पर भी निशाना साधा जो पहले इस्तीफा देकर चुनाव लड़े थे और अब आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कार्यों की भी गहन जांच कराई जाएगी और सरकार उन पर पूरी नजर बनाए हुए है। गंभीर आरोप वाले किसी भी हाल में नहीं बचेंगे, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
हड़ताली अधिकारी व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से धमका रहे हैं
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि हड़ताल पर गए कुछ अधिकारी, काम कर रहे अपने सहयोगियों को व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमका रहे हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘नेमिंग एंड शेमिंग’ यानी नाम लेकर बदनाम करने की मुहिम चलाकर उन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। प्रधान सचिव ने इसे सरकारी कार्य में सीधे तौर पर बाधा डालना करार दिया है और ऐसे सभी लोगों को तत्काल सचेत होने की हिदायत दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियां कानूनन गलत हैं और इनके गंभीर परिणाम होंगे।
अधिकारियों को धमकाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
सी.के. अनिल ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सभी जिलाधिकारियों को एक विस्तृत पत्र भी जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि काम पर लौटे अधिकारियों को धमकाने या उनके वैध सरकारी कार्यों में बाधा पहुंचाने वाले किसी भी संघ नेता या पदाधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जिलाधिकारियों को ऐसे मामलों में बिना किसी देरी के तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है, ताकि दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई हो सके। यह निर्देश राज्यभर में राजस्व विभाग के सुचारु कामकाज को सुनिश्चित करने और अधिकारियों को निर्भय होकर काम करने का माहौल प्रदान करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
प्रधान सचिव ने अपने निर्देश में उन विशिष्ट धाराओं का भी उल्लेख किया है जिनके तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 132 (सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य पालन में बाधा डालना), 351 (हमला), 352 (आपराधिक बल का प्रयोग), 126, 127 (उपद्रव से संबंधित), 349, 350 (बल प्रयोग और आपराधिक बल) और 195 (झूठे साक्ष्य देना या गढ़ना) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना) के तहत भी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी गंभीर है और साइबर धमकियों से निपटने के लिए कानूनी रूप से कितनी मजबूत तैयारी कर रही है। इन धाराओं के तहत कार्रवाई का मतलब है कि दोषी पाए जाने पर लंबी जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी सख्ती के बाद बढ़ रहा है अधिकारियों पर दबाव
बिहार सरकार की ओर से की गई इन सख्त घोषणाओं और त्वरित कानूनी कार्रवाई के निर्देशों के बाद हड़ताल कर रहे अधिकारियों के बीच दबाव तेजी से बढ़ने लगा है। विभागीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक 24 अधिकारी अपनी हड़ताल छोड़कर काम पर लौट चुके हैं। यह संख्या यह दर्शाती है कि सरकार का कड़ा रुख रंग ला रहा है और अधिकारी अब कानूनी कार्रवाई के डर से वापस अपनी जिम्मेदारियों को संभालने लगे हैं। इससे पहले ही विभाग ने एक आंतरिक निर्देश जारी किया था जिसमें गैर-हड़ताली अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर कामकाज जारी रखने के निर्देश दिए गए थे, ताकि राज्य में राजस्व संबंधी कार्यों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों में पूरी तत्परता से कार्रवाई करें और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द विभाग को भेजें। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाए, सरकारी कामकाज बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से चलता रहे और विधि-व्यवस्था बनी रहे।





