बिहार की सियासत में रविवार, 8 मार्च 2026 को एक अहम राजनीतिक संकेत सामने आया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने जेडीयू की औपचारिक सदस्यता ले ली। सदस्यता के कुछ ही समय बाद पार्टी विधायक अतिरेक कुमार ने सार्वजनिक रूप से मांग कर दी कि निशांत कुमार को आगे बढ़ाकर मुख्यमंत्री बनाया जाए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में जारी है। जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच लंबे समय से यह आवाज उठती रही थी कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आएं। अब उनके आधिकारिक तौर पर पार्टी में शामिल होने के बाद नेतृत्व की अगली पंक्ति को लेकर बहस तेज हो गई है।
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‘हम लोग यंग विधायक हैं… हम लोग चाहते हैं कि निशांत कुमार कमान थामें. मुख्यमंत्री बनाया जाए… क्योंकि जिस हिसाब से हम लोगों की बातचीत हुई है… उनके बातचीत का जो तरीका है, उसमें नीतीश कुमार झलकते हैं. यही मांग है कि पार्टी की ओर से उनको खड़ा करें।’ — अतिरेक कुमार, जेडीयू विधायक
सदस्यता के बाद मंदिर और मजार पहुंचे निशांत
जेडीयू जॉइन करने के बाद निशांत कुमार ने अपने पिता नीतीश कुमार से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे पटना के महावीर मंदिर पहुंचे और दर्शन किए। इसी क्रम में वे हाई कोर्ट के समीप स्थित मजार भी गए, जहां उन्होंने दुआ मांगी।
मीडिया से बातचीत में निशांत कुमार ने कहा कि वे अल्लाह का आशीर्वाद लेने आए हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह, वाहेगुरु और भगवान सब एक ही हैं। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार ने हमेशा सभी धर्मों को साथ लेकर चलने की राजनीति की है और वे भी उसी दिशा में चलने की कोशिश करेंगे।
एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया: ‘नई शुरुआत’ और ‘कार्यकर्ताओं में उत्साह’
निशांत कुमार की एंट्री पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने इसे सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है और लोगों को खुश होना चाहिए। उनके अनुसार, जेडीयू कार्यकर्ताओं में इस कदम को लेकर उत्साह है और वे लंबे समय से चाहते थे कि निशांत राजनीति में सक्रिय भूमिका लें।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस विकास को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि निशांत कुमार का जेडीयू में आना ‘नए युग की शुरुआत’ है। उन्होंने कहा कि बिहार और एनडीए में इसे लेकर खुशी का माहौल है और एनडीए, निशांत के साथ मिलकर काम करेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न यही है कि क्या यह एंट्री केवल संगठनात्मक सक्रियता तक सीमित रहेगी या जेडीयू नेतृत्व इसे आगे बढ़ाकर औपचारिक राजनीतिक जिम्मेदारी में बदलेगा। अभी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अतिरेक कुमार की मांग ने संकेत दे दिया है कि जेडीयू के भीतर युवा नेतृत्व को लेकर चर्चा अब खुलकर सामने आ रही है।