बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। महागठबंधन के कुल चार विधायकों ने वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया, जिनमें कांग्रेस के तीन विधायक शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस के जो विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे, उनमें वाल्मीकि नगर से सुरेंद्र कुशवाहा, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और मनिहारी से मनोहर प्रसाद शामिल हैं।
इस पूरे मामले पर बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे पार्टी के लिए एक बड़ा ‘सेटबैक’ (झटका) करार दिया और इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की साजिश होने का आरोप लगाया।
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‘विधायकों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया’
राजेश राम ने बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके विधायकों को वोट देने से रोकने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने आशंका जताई कि इसमें सरकारी मशीनरी का भी दुरुपयोग हो सकता है।
“एक तरह से हमारे विधायकों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। हो सकता है कि इसके पीछे जिला प्रशासन का भी प्रभाव रहा हो, सरकार का दबाव रहा हो। डराने, धमकाने या अपहरण कर लेने वाला दबाव हो सकता है।” — राजेश राम, अध्यक्ष, बिहार कांग्रेस
उन्होंने दावा किया कि 13 तारीख की रात तक उनकी सभी छह विधायकों से बात हुई थी, लेकिन उसके बाद कई विधायकों से संपर्क टूट गया, जिससे उन्हें अनहोनी की आशंका होने लगी थी।
‘यह BJP के काम करने का तरीका है’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस घटना की तुलना देश के अन्य राज्यों में हुए राजनीतिक उलटफेर से की। उन्होंने कहा, “पूरे देश में बीजेपी के काम करने का जो तरीका है, वो बिहार में साबित हो गया। एकनाथ शिंदे वाला प्रकरण, किस तरह से जोड़-तोड़कर सरकार बनाई। उसके पहले गोवा में हमारी जीती हुई सरकार को तोड़ दिया।”
राजेश राम ने यह भी दावा किया कि कुछ दिन पहले एक विधायक ने उन्हें बताया था कि कांग्रेस के छहों विधायकों के घरों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, जिसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने बीजेपी की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले प्रलोभन दिया जाता है, फिर डराया जाता है और अंत में किसी भी तरह से रोका जाता है। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोपों का नया दौर शुरू कर दिया है।