पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मंगलवार को हुए चुनाव में दिनभर सियासी सरगर्मी चरम पर रही। संख्याबल के हिसाब से एनडीए की चार सीटों पर जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर जबरदस्त ‘खेला’ देखने को मिला। एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए के खेमे में सेंधमारी का संकेत दिया, तो वहीं दूसरी ओर महागठबंधन के ही चार विधायक वोटिंग से गायब हो गए, जिससे पूरा समीकरण उलझ गया।
वोटिंग के दौरान सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ की दो महिला विधायकों को तेजस्वी यादव के साथ देखा गया। दोनों विधायक, अमरेंद्र धारी (महागठबंधन उम्मीदवार) और AIMIM विधायकों के साथ वोट डालने के लिए जाती हुई दिखीं। इस घटना ने क्रॉस-वोटिंग की अटकलों को हवा दे दी और एनडीए खेमे में हलचल मच गई।
4 विधायक हुए ‘गायब’, फोन भी बंद
इस सियासी खेल के बीच विपक्षी खेमे से चार विधायकों का गायब होना सबसे बड़ी खबर बनी। इनमें कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, इन सभी विधायकों ने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर लिए थे, जिससे उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था।
गायब होने वाले विधायकों में वाल्मीकि नगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा, फारबिसगंज से कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास, मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर सिंह और ढाका से राजद विधायक फैजल रहमान का नाम शामिल है। अगर ये विधायक शाम 4 बजे तक वोटिंग के लिए नहीं पहुंचते तो इससे सीधे तौर पर एनडीए के पांचवें उम्मीदवार की जीत का रास्ता साफ हो सकता था।
क्या है सीटों का गणित?
बिहार में 5 सीटों के लिए कुल 6 उम्मीदवार मैदान में थे। मौजूदा संख्याबल के अनुसार, एनडीए के पास 202 विधायकों का समर्थन था, जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक थे। इस हिसाब से एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकता था, लेकिन पांचवीं सीट के लिए पेंच फंसा हुआ था। एनडीए को पांचवीं सीट जीतने के लिए 3 और विधायकों की जरूरत थी, जबकि महागठबंधन अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों पर निर्भर था।
“हम लोग निश्चित हैं। आंकड़े हम लोगों के साथ हैं। एआईएमआईएम और बसपा के साथियों ने हमारा समर्थन किया है। हम 41 सीटों तक पहुंच चुके हैं। 41 सीटों पर जीत पक्की है।”- तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष
तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि उन्हें AIMIM और BSP का समर्थन मिल गया है, जिससे उनके उम्मीदवार की जीत पक्की है। लेकिन अपने ही कुनबे के विधायकों के गायब होने से उनके दावों पर सवाल खड़े हो गए।
एंबुलेंस से वोट डालने पहुंचे अनंत सिंह
इस गहमागहमी के बीच, जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह एंबुलेंस से बिहार विधानसभा वोट डालने पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में एनडीए की सभी 5 सीटों पर जीत का भरोसा जताया। साथ ही उन्होंने यह भी इच्छा जाहिर की कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहते तो भविष्य में वह भी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे और निशांत कुमार को बिहार का सीएम देखना चाहेंगे।






