
बिहार में चुनावी माहौल के बीच बीजेपी के फायरब्रांड नेता और विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने मंगलवार को बिहार में जल्द से जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लिए एक समान कानून होना चाहिए क्योंकि अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून देश की एकता और अखंडता के लिए नुकसानदेह हैं। बचौल ने यह भी कहा कि समाज में भेदभाव बढ़ रहा है और एक विशेष समुदाय के लोग डर का माहौल महसूस कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने किसी समुदाय का नाम नहीं लिया।
जदयू ने बीजेपी के बयान पर जताई असहमति
इस मामले में जदयू ने बीजेपी के नेता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। पार्टी प्रवक्ता अरविंद निषाद ने कहा कि नीतीश कुमार के राज में किसी भी समुदाय के लोग खुद को असुरक्षित महसूस नहीं करते और यूसीसी लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एनडीए के नेताओं को ऐसे विवादित मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करने से बचना चाहिए। जदयू का यह रुख स्पष्ट करता है कि पार्टी चुनावी माहौल में संवेदनशील मुद्दों को लेकर सतर्क है और किसी भी समुदाय को असहज करने से बचना चाहती है।
यूसीसी का महत्व और विवादित पहलू
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी ऐसा कानून है जो सभी धर्मों, जातियों, लिंगों और समुदायों के लिए एक समान कानून बनाता है। यह कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकारों जैसे सिविल मामलों में एकरूपता लाने का प्रयास करता है। यूसीसी का मकसद भेदभाव खत्म कर सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। हालांकि, यूसीसी को लेकर भारत में लंबे समय से विवाद रहा है क्योंकि कुछ समुदाय इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं, जबकि समर्थक इसे समानता और विकास के लिए आवश्यक मानते हैं।
चुनावी साल में फिर गरमा उठा यूसीसी का मुद्दा
चुनावी वर्ष में बिहार में यूसीसी का मुद्दा फिर से गरमा गया है। बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल का कहना है कि अगर क्रिमिनल कानून पूरे देश में एक जैसा है तो सिविल कानून भी एक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर मिली विशेष छूट से सामाजिक असमानता और भेदभाव बढ़ रहे हैं। उनका यह बयान बिहार की राजनीति में नया बहस का विषय बन गया है, जहां एक तरफ बीजेपी यूसीसी लागू करने पर जोर दे रही है तो वहीं जदयू इसे लागू नहीं करने की बात कह रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दल किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और इसका चुनावी परिणाम क्या होता है।
