बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन मापने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने जमीन मापने की प्रक्रिया को अब ऑनलाइन बनाते हुए नई व्यवस्था लागू होने वाली है। आम नागरिकों को अब जमीन मापी के लिए सराकरी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। यह व्यवस्था 26 जनवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होगी। इसकी जानकारी खुद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दी है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में जमीन मापी की नई व्यवस्था लागू होने वाली है। इसे लेकर 26 जनवरी से महाअभियान की शुरुआत होने वाली है। राज्य में जमीन मापी के लिए अब ऑनलाइन आवेदन करते समय ही जमीन के अविवादित या विवादित होने की जानकारी देनी होगी।
7 दिन में पूरी होगी अविवादित जमीन की मापी
नई व्यवस्था के तहत अविवादित जमीन की मापी अब सिर्फ 7 दिन में पूरी होगी। वहीं, विवादित मामलों में भी अधिकतम 11 दिन के भीतर मापी कर दी जाएगी। आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होगा और मापी रिपोर्ट 14 दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड कर दी जाएगी। पहले इस पूरी प्रक्रिया के लिए 30 दिन तक का समय लगता था।
नई व्यवस्था में मापी शुल्क तय
नई व्यवस्था में मापी शुल्क को भी निर्धारित कर दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में प्रति खेसरा ₹500 और शहरी क्षेत्रों में ₹1000 शुल्क लगेगा। अगर कोई तत्काल मापी कराना चाहता है तो उसे दोगुना शुल्क देना होगा। बता दें कि आवेदन के समय आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि भूमि अविवादित है या विवादित। यदि भूमि विवादित पाई जाती है तो अंचलाधिकारी द्वारा विवाद की प्रकृति को परिभाषित किया जाएगा।
31 मार्च 2026 तक चलाया जाएगा मापी महाअभियान
बता दें कि इस व्यवस्था को मापी महाअभियान के रूप में 31 मार्च 2026 तक चलाया जाएगा। यह व्यवस्था बिहार काश्तकारी नियमावली, 1885 के नियम 23 (2)(ì)के तहत की गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी. के. अनिल द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब भूमि मापी के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जाएंगे।
