पटना: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखने लगा है। तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम में करीब 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे इसकी नई कीमत लगभग 114 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है। हालांकि, आम आदमी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस मूल्य वृद्धि को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है।

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और  विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने इस फैसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस बढ़ोतरी को जनता के साथ सरासर अन्याय बताया है।

‘नीम पर करैला साबित हुआ यह फैसला’

मुकेश सहनी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला लोगों के लिए ‘नीम पर करैला’ जैसा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पहले से ही रसोई गैस की किल्लत से लोग परेशान हैं और अब प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। सहनी के मुताबिक, यह कदम साबित करता है कि सरकार जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने में एक बार फिर विफल रही है।

“अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में मामूली वृद्धि होने के बाद सरकार द्वारा प्रीमियम पेट्रोल पर करीब 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करना जनता के साथ अन्याय है।”- मुकेश सहनी, प्रमुख, वीआईपी

सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप

वीआईपी नेता ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी कम हो गई थीं, तब सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों के दाम क्यों नहीं घटाए थे? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर मुनाफाखोरी करते हुए यह फैसला लिया है।

उन्होंने कहा, “बिहार में पहले से ही कई अन्य राज्यों की तुलना में पेट्रोल और डीजल के दाम अधिक हैं। अब इस बढ़ोतरी से जीवन की बुनियादी जरूरतें भी महंगी हो जाएंगी, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ेगी। यह पूरी तरह से जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला निर्णय है।” मुकेश सहनी ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से मांग की है कि पेट्रोल के बढ़ाए गए दाम तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं।