79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुक्रवार (15 अगस्त, 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि RSS का 100 साल का इतिहास राष्ट्र सेवा और मां भारती के कल्याण के लिए समर्पित रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के संकल्प के साथ स्वयंसेवकों ने अपने जीवन को देश की सेवा के लिए समर्पित किया। उनके इस भाषण को बीजेपी नेताओं ने गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक बताया।
विपक्षी प्रतिक्रिया: मनोज झा का बयान
इस बयान के बाद विपक्ष के नेता लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि लाल किले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री बोलते हैं तो उम्मीद होती है कि वे देश के प्रधानमंत्री की तरह बिना विद्वेष और पूर्वाग्रह के बोलेंगे। मनोज झा ने कहा, “प्रधानमंत्री हर बार निराश करते हैं। आजादी के दिन RSS की भूमिका पर चर्चा होती तो हमें खुशी होती। यह एक सांस्कृतिक संगठन है, और देश के प्रधानमंत्री को इसका मूल्यांकन करना चाहिए। अब फर्क करना मुश्किल हो गया कि यह भाषण चुनावी है या देश के लिए संबोधन।”
बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
वहीं, बीजेपी सांसद रवि शंकर प्रसाद ने पीएम के भाषण की सराहना की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का लाल किले की प्राचीर से भाषण ऐतिहासिक रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं भारत के किसानों, गौपालकों, मछुआरों और दूध उत्पादन करने वालों के हित से कभी पीछे नहीं हटूंगा। एक स्वयंसेवक के रूप में मुझे गर्व हुआ कि RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर इसकी तारीफ हुई।”
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर बीजेपी इसे देशभक्ति और संगठन के योगदान का सम्मान मान रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे पूर्वाग्रहपूर्ण और चुनावी रुख बता रहा है। मनोज झा ने चेतावनी दी कि स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले की प्राचीर से दिए जाने वाले भाषण में किसी संगठन के पक्ष में झुकाव जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
