राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार, 06 अप्रैल को बिहार में लागू शराबबंदी कानून को पूरी तरह विफल बताते हुए एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। यादव ने सीधा आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन और शराब माफिया के कथित गठजोड़ के कारण यह कानून अब ‘राज्य का सबसे बड़ा संस्थागत भ्रष्टाचार’ बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि इस शराबबंदी के कारण बिहार में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की एक गैरकानूनी समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। यह आंकड़ा राज्य की आर्थिक स्थिति और कानून व्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव को दर्शाता है।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यादव ने अपने एक बयान में शराबबंदी के बाद के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि जब से शराबबंदी लागू हुई है, तब से राज्य में 11 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 16 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये आंकड़े अकेले ही यह बताने के लिए काफी हैं कि किस बड़े पैमाने पर कानून का उल्लंघन हो रहा है और इसका सीधा बोझ राज्य की न्यायिक प्रणाली और जेलों पर पड़ रहा है। यादव ने यह भी जानकारी दी कि अब तक राज्य में पांच करोड़ लीटर से अधिक शराब बरामद की गई है। पिछले पांच वर्षों में ही दो करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई, जिसका औसत प्रतिदिन 11 हजार लीटर से अधिक बैठता है। यह दर्शाता है कि इतनी सख्ती के बावजूद शराब का अवैध कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार जारी, सरकार के आंकड़े भी कर रहे पुष्टि
तेजस्वी यादव ने सरकार के आंकड़ों पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि ये बरामदगी के आंकड़े ही कानून की विफलता की कहानी कह रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2026 में औसतन 3 लाख 70 हजार 684 लीटर अवैध शराब हर महीने बरामद की गई, जो प्रतिदिन करीब 12,356 लीटर होती है। राजद नेता ने आरोप लगाया कि यह तो केवल जब्त की गई शराब के आंकड़े हैं। जमीनी स्तर पर राज्य में प्रतिदिन शराब की वास्तविक खपत इससे कहीं ज्यादा है, जिसे सरकार छिपाने का प्रयास कर रही है। यादव ने बताया कि खुद सरकार के अनुसार वर्ष 2026 में शराब की बरामदगी में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर दर्शाता है कि शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार न केवल जारी है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है, जो सरकार के दावों के विपरीत है।
यादव ने शराबबंदी के एक और गंभीर परिणाम की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी लागू होने के बाद राज्य में अन्य नशीले पदार्थों का कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। युवाओं में गांजा, ब्राउन शुगर और विभिन्न प्रकार की नशीली दवाओं का सेवन पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। यह स्थिति राज्य के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इससे युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में फंसती जा रही है और सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि राज्य की सीमाओं में इतनी बड़ी मात्रा में शराब किसके सहयोग से लाई जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि शराब की वास्तविक खपत के आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं, जबकि यह एक महत्वपूर्ण जानकारी है जिससे नीति निर्माण में मदद मिल सकती है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री यादव ने बिहार में शराब की दुकानों के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004-05 में बिहार के ग्रामीण इलाकों में शराब की 500 से भी कम दुकानें थीं। वहीं, 2005 में पूरे राज्य में लगभग 3,000 दुकानें थीं, जो 2015 तक बढ़कर 6,000 से अधिक हो गईं। यादव ने आरोप लगाया कि उस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दुकानें खोली गईं, जिससे शराब की उपलब्धता बढ़ी और खपत भी बढ़ी। यह इतिहास इस बात पर जोर देता है कि शराबबंदी से पहले भी शराब के कारोबार का विस्तार हुआ था, और अब प्रतिबंध के बाद उसका अवैध रूप से फलना-फूलना एक गंभीर चुनौती बन गया है।
तेजस्वी यादव ने गिरफ्तारियों पर भी उठाए गंभीर सवाल
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने शराबबंदी कानून के तहत हुई गिरफ्तारियों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस कानून के तहत जितनी भी गिरफ्तारियां हुई हैं, उनमें से अधिकांश गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोग शामिल हैं। यादव ने आरोप लगाया कि ‘बड़ी मछलियों’ यानी असली शराब माफिया, बड़े तस्करों और इस अवैध कारोबार में शामिल प्रभावशाली लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह स्थिति कानून के न्यायपूर्ण क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लगाती है और गरीबों पर ही कानून का बोझ डालने का आरोप पुष्ट करती है। यादव ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार को उन अधिकारियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो कथित रूप से शराबबंदी को विफल करने में लगे हुए हैं। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कानून का पालन ईमानदारी से हो और इसमें शामिल किसी भी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति को बख्शा न जाए।
शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन? मेरे सवालों, तर्कों और तथ्यों का जवाब दें।
शराबबंदी क़ानून को लागू किए कल 𝟏𝟎 वर्ष पूर्ण हुए लेकिन यह शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह क़ानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा।
शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे…
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) April 6, 2026






