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एंबुलेंस कर्मचारियों ने सुक्खू सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, सचिवालय के बाहर दिया धरना, 12 अप्रैल तक जारी रहेगा प्रदर्शन, जानें क्या हैं इनकी मांगें

Written by:Gaurav Sharma
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हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के सैकड़ों कर्मचारी सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और अन्य लाभों की मांग कर रहे हैं, जो उन्हें कई सालों से नहीं मिल रहे हैं। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 12 अप्रैल तक चलने वाला यह संघर्ष और तेज होगा।
एंबुलेंस कर्मचारियों ने सुक्खू सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, सचिवालय के बाहर दिया धरना, 12 अप्रैल तक जारी रहेगा प्रदर्शन, जानें क्या हैं इनकी मांगें

हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के सैकड़ों कर्मचारी सोमवार को सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। अपनी मांगों को लेकर यह प्रदर्शन 12 अप्रैल तक चलेगा। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई सालों से शोषण का शिकार बनाया जा रहा है, जिसमें न्यूनतम वेतन न मिलना और 12 घंटे की ड्यूटी के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान न होना शामिल है। इस प्रदेशव्यापी हड़ताल में सैंकड़ों कर्मचारियों ने भाग लिया।

मुख्य नियोक्ता नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडस्वान फाउंडेशन में काम कर रहे ये पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी कहते हैं कि उन्हें सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। दिन में 12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का कोई पैसा नहीं मिलता। यह स्थिति तब है जब उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय ने भी इनके शोषण को रोकने के आदेश दिए हैं। इन आदेशों के बावजूद पिछले कई वर्षों से कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर जारी है।

कर्मचारियों ने प्रताड़ना का लगाया आरोप

कर्मचारियों का कहना है कि जब वे अपनी यूनियन के माध्यम से आवाज उठाते हैं, तो उन्हें मानसिक तौर पर और अन्य तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है। यूनियन के नेतृत्वकारी कर्मचारियों का या तो तबादला कर दिया जाता है, या फिर उन्हें मानसिक रूप से इतना परेशान किया जाता है कि वे नौकरी से त्यागपत्र देने पर मजबूर हो जाते हैं। कई कर्मचारियों को बिना किसी कारण के कई महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ जाती है।

कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी भारी गड़बड़ियां हैं। नियम के अनुसार, ईपीएफ में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का शेयर होता है, लेकिन यहां कर्मचारियों के वेतन से ही दोनों शेयर काट लिए जाते हैं। इसके अलावा, कुल वेतन में उनका मूल वेतन यानी बेसिक सैलरी भी बहुत कम है, जिससे उन्हें मिलने वाले भविष्य निधि और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

छंटनी के बाद कर्मचारियों को नहीं मिला कोई भत्ता या एरियर

यूनियन ने बताया कि मेडस्वान फाउंडेशन से पहले ये कर्मचारी जीवीके ईएमआरआई कंपनी के पास कार्यरत थे। जब उस कंपनी से कर्मचारियों की छंटनी की गई या उनकी सेवाएं समाप्त की गईं, तब इन कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे या किसी भी प्रकार के एरियर का भुगतान नहीं किया गया। इस तरह ये कर्मचारी लंबे समय से भयंकर रूप से शोषित हैं और उन्हें अपने वाजिब हक से वंचित रखा जा रहा है।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने पहले दिन प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने साफ कहा कि कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाए। बारह घंटे कार्य करने पर नियमानुसार डबल ओवरटाइम वेतन का भुगतान हो। कर्मचारियों को नियमानुसार सभी छुट्टियों का प्रावधान किया जाए। इसके साथ ही गाड़ियों की मेंटेनेंस व इंश्योरेंस के दौरान कर्मचारियों का वेतन न काटा जाए और उन्हें पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए।

यूनियन ने सरकार और संबंधित फाउंडेशन को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो संघर्ष और तेज होगा। 12 अप्रैल तक चलने वाले इस प्रदर्शन के बाद भी यदि कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो कर्मचारी भविष्य में और बड़े और निर्णायक कदम उठाने को मजबूर होंगे। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर लड़ाई जारी रखेंगे।

Gaurav Sharma
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