हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान पार्टी के भीतर बढ़ती दखलअंदाजी को लेकर सख्त चेतावनी दी है। दरअसल कुलदीप सिंह राठौर ने साफ कहा है कि विधायकों के चुनाव क्षेत्रों में दूसरे नेताओं का हस्तक्षेप किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर कुछ नेताओं द्वारा अपनी सीमाओं से बाहर जाकर सक्रिय होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
दरअसल कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि उन्हें लगातार ऐसी जानकारी मिल रही है कि कुछ नेता जानबूझकर दूसरे विधायकों के क्षेत्रों में सक्रिय हो रहे हैं। इससे संगठन में अनावश्यक अव्यवस्था पैदा हो रही है और कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने इस प्रवृत्ति को तुरंत बंद करने की चेतावनी दी है। राठौर ने साफ कहा है कि यदि यह गतिविधि जारी रही तो पार्टी कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
वहीं कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि पार्टी हाईकमान इस मामले को गंभीरता से देख रहा है। जो भी नेता अनुशासन तोड़ेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी नेताओं को पार्टी संविधान के दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी है। राठौर ने कहा है कि किसी को भी पूरी तरह से खुली छूट नहीं दी जाएगी और सभी को पार्टी के नियमों का पालन करना होगा।
संगठन की मजबूती के लिए अनुशासन जरूरी
राठौर ने कहा है कि किसी भी मजबूत संगठन के लिए अनुशासन बहुत जरूरी होता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अब अनुशासन के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया है कि पार्टी हाईकमान ने हाल ही में उन्हें अनुशासन समिति का अध्यक्ष बनाया है, जिससे साफ है कि पार्टी आंतरिक अनुशासन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। उनका कहना है कि पार्टी के नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में रहकर संगठन को मजबूत करना चाहिए। आंतरिक खींचतान और आपसी टकराव से पार्टी कमजोर होती है, इसलिए सभी नेताओं को मिलकर काम करना चाहिए।
सेब पर जीरो टैरिफ का विरोध
मीडिया से बातचीत के दौरान कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत सेब पर जीरो टैरिफ की मांग का विरोध किया है। राठौर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के बागवानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में सेब बागवानी की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। लाखों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि विदेशी सेबों पर आयात शुल्क कम किया जाता है तो इससे स्थानीय बागवानों को भारी नुकसान हो सकता है।
सेब पर आयात शुल्क कम होने से खतरा
राठौर ने कहा है कि अगर सेब पर आयात शुल्क कम कर दिया जाता है तो सस्ते विदेशी सेब बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में आ सकते हैं। इससे स्थानीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह अमेरिका के दबाव में कोई ऐसा फैसला न करे जिससे देश के किसानों को नुकसान हो। राठौर ने कहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में देश के किसानों और उत्पादकों के हितों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।
राठौर ने हिमाचल विधानसभा में पारित प्रस्ताव का भी जिक्र किया है और उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है। उनका कहना है कि इन राज्यों में भी सेब बागवानी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार है। ऐसे में विदेशी सेबों के सस्ते आयात से वहां के किसानों को भी नुकसान हो सकता है।






