कोरोना संकटकाल के बीच पूर्व CMHO की अनूठी पहल, वेक्सीन परीक्षण के लिये सौंपी अपनी बॉडी

कोरोना संकटकाल के बीच पूर्व CMHO की अनूठी पहल, वेक्सीन परीक्षण के लिये सौंपी अपनी बॉडी

बड़वानी।

एक तरफ़ प्रदेश में तेज़ी से कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है…वही दूसरी तरफ़ इस संकट काल में सेकडों लोग किसीने किसी तरह मदद के लिए सामने आ रहे हैं। अब एमपी(MP) के एक अधिकारी ने अपने शरीर को थेरेपी के लिये दान देने की पहल की है। इसके लिये बकायदा उन्होंने पीएम और सीएम को पत्र लिखा है।

दरअसल मामला बड़वानी जिले का है। जहाँ एक रिटायर(retire) मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जंग जितने की मिसाल पेश करते हुए प्रधानमंत्री मोदी(primeminister modi) को पत्र लिखा है। अधिकारी ने पीएम मोदी(PM Modi) को पत्र लिख ये घोषणा की है कि अगर कोरोना के टीकाकरण(Vaccination) के लिए इंसानी शरीर की आवश्यकता हो तो वो बिना किसी शर्त अपना शरीर देने को तैयार हैं।

शनिवार को रिटायर मुख्य चिकित्सा अधिकारी अब्दुल रशीद पटेल ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर ये कहा है कि अगर कोरोना टीकाकरण के परिक्षण के लिए किसी इंसान की जरूरत हो तो वो बिना किसी शर्त के इस परिक्षण के लिए तैयार हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी पटेल ने ये भी कहा कि उनका ये निर्णय देशहित एवं जनहित में लिया गया निर्णय है। बता दें कि पटेल खुद स्वास्थ्य विभाग में बड़े पद पर रहे हैं और टीकाकरण के रिस्क को भी भली-भांति जानते हैं बावजूद उसके इन्होने राष्ट्रहित में ये फैसला लिया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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