गोपाल भार्गव का तंज, मुर्गे की तरह रोज बांग देते हैं दिग्विजय

गोपाल भार्गव का तंज, मुर्गे की तरह रोज बांग देते हैं दिग्विजय

जबलपुर, संदीप कुमार। राम मंदिर निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुशंसिक संगठन अब घर घर जाकर समपर्ण निधि जुटाएगा जिसमे की भाजपा भी अपना योगदान देगी, जबलपुर में आज इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक में महाकौशल, विन्ध और बुंदेलखंड संभाग के विधायक,मंत्री और सांसद शामिल हुए।

राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाई जाएगी समर्पण निधि

राम मंदिर निर्माण के लिए पूरे देश में समर्पण निधि जुटाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके अनुषांगिक संगठनों के साथ भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी भी घर घर जाकर निधि जुटाएंगे।इस दौरान बैठक में शामिल होने आए मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि मंदिर के निर्माण के जितने भी लोग चाहे वो हमारी विचारधारा के हो या कांग्रेस के शामिल हो सकते है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भी साधा निशाना
कोरोना काल मे समर्पण निधि जुटाने पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आपत्ति जताई है उनकी इस आपत्ति पर लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने तंज कसा है, उन्होंने कहा कि जब कभी अच्छे काम होते है तो वो कुछ न कुछ आपत्ति लगाते है, उन्होंने कहा कि दिग्विजयसिंह उस तरह के हो गए है जैसे कि मुर्गा सुबह बांग देने में जुट जाता है वैसे ही दिग्विजय सिंह है जो सुबह होते ही कुछ न कुछ बोलते है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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